रविवार, 5 फ़रवरी 2017

👉 संकल्पवान्-व्रतशील बनें (भाग 2)

👉 युग ऋषि की अमृतवाणी

🔴 रावण से लड़े बिना कहीं काम चला? दुर्योधन से लड़े बिना काम चला? कंस से लड़े बिना काम चला? लड़ाई मोहब्बत की है अथवा कैसी है, हिंसा की है, अहिंसा की है, ये मैं इस वक्त बात नहीं कह रहा हूँ। मैं तो यह कह रहा हूँ कि आपको अपनी बुराइयों, कमजोरियों से मुकाबला करने के लिये और समाज में फैले अनाचार से लोहा लेने के लिए भी, हर हालत में आपको ऐसे ऊँचे विचारों की सेना बनानी चाहिए जो आपको भी हिम्मत देने में समर्थ हो सके और आपके समीपवर्ती इस वातावरण में भी नया माहौल पैदा करने में समर्थ हो सके। ये संकल्प भरे विचार होते हैं।

🔵 हजारी किसान ने ये फैसला किया था कि ‘‘मुझे हजार आम के बगीचे लगाने हैं।’’ बस घर से निकल पड़ा तो उसकी बात लोगों ने मान ली। क्यों मान ली? वो संकल्पवान् था। संकल्पवान् नहीं होता, तब ऐसे ही व्याख्यान करता फिरता, ‘‘साहब! पेड़ लगाइये, हरियाली बढ़ाइये।’’ तब कोई लगाता क्या? संसार इतना प्रचार किया करती है, कोई सुनता है क्या? सुनने के लिये ये बहुत जरूरी है कि जो आदमी उस बात को कहने के लिये आया है, वो संकल्पवान् हो। संकल्पवान् होने का अर्थ है, ऊँचे सिद्धान्तों को अपनाने का निश्चय। अवश्य निश्चय में कोई, रास्ते में कोई व्यवधान न आये, इसीलिये थोड़े-थोड़े समय के लिये ऐसे अनुशासन जिससे कि स्मरण बना रहे, मनोबल बढ़ता रहे, मनोबल गिरने न पाये। संकल्प की याद करके आदमी अपनी गौरव-गरिमा को बनाये रह पाये। इसलिये आपको व्रतशील होना जरूरी है।

🔴 पीले कपड़े पहनने के लिये आपको कहा गया है, ये व्रतशील होने की निशानी है। दूसरे लोग पीले कपड़े नहीं पहनते, आपको पहनना चाहिए। इसका मतलब ये है, दुनिया का कोई दबाव आपके ऊपर नहीं है और दुनिया की नकल करने में और अनुकरण करने में आपकी कोई मर्जी नहीं है। ये क्या है, ये व्रतशील की निशानी है। भोजन जैसा भी हो, खराब है तो खराब से क्या करें? खराब से ही काम चलायें, लेकिन नहीं साहब! जायका अच्छा नहीं लगता, वहाँ कचौड़ी खायेंगे। मत कीजिए ऐसा। तरह-तरह के व्यंजन और तरह-तरह के स्वादिष्ट भोजन की बात मत चलाया कीजिए। फिर क्या होगा? खान-पान का जो लाभ होगा तो होगा ही, खान-पान के लाभों को मैं इतना महत्त्व देता नहीं, जितना कि इस बात को महत्त्व देता हूँ कि आपने अपने मन को कुचल डालने का, मन से लोहा लेने का, मन को बदल डालने के लिये आपने वो हथियार उठा लिया, जिससे आपका दुश्मन, आपका दोस्त बन सकता है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/amart_vachan_jivan_ke_sidha_sutra/sankalpvaan_vratsheel_bane

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