सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 103)

🌹 प्रगतिशील जातीय संगठनों की रूपरेखा

🔴 8. विवाह योग्य लड़की लड़कों की जानकारी:-- संगठन बन जाने पर उसका प्रथम कार्य प्रगतिशील लोगों के लड़के लड़कियों की जानकारी क्षेत्रीय दफ्तर में एकत्रित करना है। प्रत्येक ग्राम सभा अपने यहां से इस प्रकार की सूचना संग्रह करके क्षेत्रीय कार्यालयों में भेजा करेगी। जो लोग आदर्श विवाह करने के लिए सहमत हों, उन्हीं की जानकारियां संग्रह की जांय। क्योंकि यह सारा प्रयत्न ही आदर्श विवाहों के प्रचलन के लिये किया गया है। जिन्हें पुराने ढर्रे के देन-दहेज और ठाट-बाट के विवाह करने हैं वे अपने आप, अपने ढंग से लड़की-लड़के ढूंढ़ते रहते हैं। हमें तो उन लोगों की सुविधा की दृष्टि से इतना बड़ा यह ढांचा खड़ा करना पड़ रहा है जो आदर्श विवाहों के इच्छुक हों, उनको अपने ही विचारों एवं आदर्श वाले सम्बन्धी मिल सकें यही हमारा उद्देश्य रहना चाहिये।

🔵 ऐसी सूचनाऐं एक क्षेत्र के एक ही दफ्तर में रह सकती हैं। उस क्षेत्र की सभी उपजातियों या जातियों की सूचनाएं अलग-अलग फाइलों में एक ही दफ्तर में एकत्रित रह सकती हैं। सभी जातियों का एक ही दफ्तर रह सकता है। इसी प्रकार संगठनकर्त्ता भी एक ही सब जातियों के लिए काम दे सकता है। क्षेत्रीय प्रगतिशील जातीय सभा कार्यालय आरम्भ में एक ही रखना होगा। पीछे जब काम का बहुत विस्तार हो तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र आदि चार वर्णों के अलग-अलग कार्यालय बांटे जा सकते हैं और यदि काम बहुत बढ़ जाय तो उपजातियों के लिये भी अलग दफ्तर की आवश्यकता पूरी की जा सकती है, पर आरम्भ में एक ही संगठन-कर्त्ता की नियुक्ति करना उचित होगा।

🔴 9. प्रचार साधन और सुविधाएं:-- आदर्श विवाहों की आवश्यकता, उपयोगिता एवं रूपरेखा समझने के लिये व्यापक प्रचार की आवश्यकता होगी। इन विचारों से जब तक लोगों को प्रभावित न किया जायगा, तब तक वे उससे सहमत न होंगे और वैसा करने के लिए साहस न कर सकेंगे। इसलिये छोटी-मोटी पुस्तिकाएं पढ़ना, भजन, गायन, चित्र प्रदर्शिनी, कवि-सम्मेलन, सभा-सम्मेलन, गोष्ठियां आदि के छोटे-छोटे आयोजन आदि माध्यमों से लोगों में आदर्श विवाहों की भावना आकांक्षा एवं हिम्मत पैदा करनी चाहिए। 

🔵 वैसे जोड़े ढूंढ़ने में अधिक व्यक्तियों की सहायता की जानी चाहिये। उत्सव का रूप प्रभावशाली एवं आकर्षक कैसे बने, इसकी व्यवस्था बनाने में सहयोग होना चाहिये, तथा जहां भी ऐसे विवाह हों, उनका प्रचार दूर-दूर तक करने के लिये प्रयत्न होना चाहिये। यह सुविधाएं प्रस्तुत करना क्षेत्रीय संगठन का काम हैं। इन प्रयत्नों से ही उत्साह उत्पन्न होगा और उत्साह सामूहिक कार्यक्रमों की प्रगति का मूलभूत आधार होता है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 बूढ़ा पिता

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