शनिवार, 21 जनवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 79)

🌹 आदर्श विवाहों के लिए 24 सूत्री योजना

🔴 7—दहेज लोभ के लिए नहीं दक्षिणा के रूप में:- मांगलिक कार्यों में पूजा सामग्री के रूप में दक्षिणा का भी स्थान है। वर-पूजन के रूप में एक रुपया या ग्यारह रुपया, विशेष मांगलिक अवसरों पर दिया जा सकता है। अधिक से अधिक यह राशि 101 रु. हो सकती है।

🔵 विवाह में तीन ऐसे अवसर रह सकते हैं। पक्की, दरवाजे पर स्वागत, विदाई। इन तीन रस्मों में नकदी 300 रु. से अधिक न दी जानी चाहिए। यह विशुद्ध रूप से पूजा दक्षिणा मानी जाय, कोई लेन-देन ठहराव या लाभ, लोभ की दृष्टि से न गिने। इससे अधिक लेन-देन या ठहरौनी को अवांछनीय माना जाय। वर्तमान कानूनों के अनुसार वह एक अपराध तो है ही। उसमें जेलखाने जाने और कड़ा दंड भुगतने की व्यवस्था तो है ही। कानून के भय से नहीं, नैतिकता एवं मानवता के कर्तव्यों का ध्यान रखकर भी इस दहेज प्रथा को उन्मूलन करने के लिए प्राण-पण से प्रयत्न किया जाय जिसने हिन्दू जाति को आर्थिक दृष्टि से खोखला, नैतिक दृष्टि से बेईमान, मानसिक दृष्टि से चिन्तातुर एवं असहाय बना रखा है। इस सामाजिक पाप से कलंकित सवर्ण हिन्दुओं के मुख को धोने का प्रयत्न हमें विशेष भावनापूर्वक करना चाहिए।

🔴 लड़के के अभिभावक या लड़का धन या वस्तुओं की कोई मांग न करें।

🔵 8—वर पक्ष जेवर न चढ़ावें:- कीमती जेवर और कपड़े चढ़ाने की समस्या लड़के वालों के लिए उतनी ही विकट है जितनी लड़की वालों के लिए दहेज देने की। यह दोनों प्रथायें एक दूसरे के साथ घनिष्ठ रूप में जुड़ी हुई हैं। इसलिए दोनों को एक ही बार समाप्त करना होगा।

🔴 लड़की वाले यह आशा करते हैं कि लड़के की ओर से कीमती जेवर, कपड़े कन्या के लिए आवें। इसमें जो खर्च पड़ता है उसे लड़के वाला दहेज के रूप में वसूल करता है। लड़के की शिक्षा आदि में वह भी इतना खर्च कर चुका होता है कि इन दिखावे मात्र की बेकार चीजों में धन लुटाने के लिए उसके पास भी बचा नहीं होता। कन्या वालों को अपनी ही तरह लड़के वालों की भी कठिनाई समझनी चाहिए और उन्हें जेवर, कपड़े में धन खर्च करने की चिन्ता से मुक्त कर देना चाहिए।

🔵 विवाह में वर पक्ष की ओर से लड़की के लिए एक सोने की अंगूठी, पैरों के लिए चांदी के तोड़िए यह दो जेवर ही चढ़ाये जांय और एक सूती, एक रेशमी जोड़ी कपड़े हों। जो कुछ लड़की के लिए लाया गया है उसका दिखावा जरा भी न हो।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 उपयोगिता की समझ

🔶 एक बादशाह अपने कुत्ते के साथ नाव में यात्रा कर रहा था। उस नाव में अन्य यात्रियों के साथ एक दार्शनिक भी था। 🔷 कुत्ते ने कभी नौका में ...