शनिवार, 21 जनवरी 2017

👉 आप अपने आपको पहचान लीजिये (भाग 3)

🔴 अच्छा हनुमान् जी की बात मालूम है आपको कि नहीं मालूम हनुमान् जी को रामचंद्र जी ने कहा कि हमारे साथ- साथ चलो हमारा कुछ काम करो हनुमान् जी को फायदा हुआ कि नुकसान हुआ। क्या हुआ रामचंद्र जी की सीता जी से क्या रिश्ता रामचंद्र जी से क्या रिश्ता और उनके साथ जाने में जहाँ नौकरी का सवाल नहीं और सारी जिंदगी भर जब वह सयाने हो गये थे बड़े हो गये थे ब्याह होने दिया न शादी होने दी न अच्छे कपड़े पहनने दिये और रामचंद्र जी उनको ले गये। नुकसान किया कि नफा किया। नुकसान किया। 

🔵 किसी से पूछा रीछ बंदरों से क्यों भाई कहाँ जा रहे हो वहाँ जा रहे हैं रामचंद्र जी के यहाँ जा रहे हैं क्यों। क्या बात है रामचंद्र जी के यहाँ रामचंद्र जी स्त्री धर्मपत्नी को चोरी हो गई है और उनको हम तलाश करेंगे रावण से लड़ेंगे। अरे मरेगा क्या बेवकूफ किसने पट्टी पढ़ा दी है मालूम यह पड़ता है कि नुकसान की बात बताई जा रही है लेकिन क्या वास्तव में नुकसान की बात थी नहीं नुकसान की बात नहीं थी अगर नुकसान की बात रही होती तो हनुमान् जी ने समुद्र को छलांग कैसे लिया और पहाड़ उखाड़कर के कैसे ले आये और रामचंद्र जी को और लक्ष्मण जी को कंधे पर रखकर कैसे फिरे। लंका जलाने में समर्थ कैसे हुए। 

🔴 नुकसान था नुकसान नहीं था हनुमान् जी बहुत बड़े हो गये नहीं तो बंदर होते बंदर देखे हैं न आपने मदारियों के यहाँ नाचते रहते हैं बंदर आ जाते हैं तो कहते हैं मारो बंदर को भगाओ बंदर को। बंदर रह जाते लेकिन दूर की बात उनको दिखाई पड़ी कि नई इसमें मेरा लाभ है रामचंद्र जी के कहने में। उन्होंने देखा रामचंद्र जी वजनदार आदमी हैं। समझदार आदमी है। विश्वामित्र जी के बारे मे यही सोचा गया कि विश्वामित्र समझदार आदमी हैं बेअकल नहीं है बेवकूफ नहीं है हमारे बच्चों को ले जा रहे हैं तो मारने के लिए नहीं ले जा रहे हैं किसी बड़े काम के लिए ले जा रहे हैं। इस तरीके से ले गये लेकिन उस समय उनको नुकसान मालूम पड़ा था। बहुतों को मालूम पड़ा होगा। 

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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