शनिवार, 21 जनवरी 2017

👉 पराक्रम और पुरुषार्थ (भाग 25) 22 Jan

🌹 उत्साह एवं सक्रियता चिरयौवन के मूल आधार

🔵 प्रगति की आकांक्षा किसे नहीं होती? प्रत्येक व्यक्ति अपनी स्थिति से असन्तुष्ट रहता है और उससे आगे बढ़कर उन्नत स्थिति को प्राप्त करना चाहता है। बहुत से इसके लिए प्रयास भी करते हैं और अनेकों सफल भी होते हैं। कारण संकल्प का अभाव, प्रयत्नों में प्रखरता की कमी और तत्परता का न होना। बहुत से व्यक्ति युवावस्था में बड़े जोश-खरोश के साथ अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करते हैं, किन्तु थोड़े से प्रयत्न करने के बाद ही निराश हो जाते हैं। बहुतों की स्थिति ऐसी होती है, प्रयत्न और संघर्ष करते-करते युवावस्था बीत जाती है और वे अपने आपको वृद्ध समझकर हार थककर बैठ जाते।

🔴 वृद्धावस्था क्या सचमुच जीवन की सन्ध्या बेला है? इस प्रश्न का उत्तर उनके लिए ‘‘हां’’ में ही होता है किन्तु वास्तव में ऐसा है नहीं। बहुत से व्यक्तियों ने जिसे वृद्धावस्था कहते हैं। इस उम्र तक सामान्य जीवन बिताया और उसके बाद उनमें प्रगति के लिए ऐसी उदात्त आकांक्षा उत्पन्न हुई कि उसके बाद अपने प्रखर प्रयत्नों से उन्नति के उच्च शिखर पर पहुंचे। संस्कृत के प्रसिद्ध विद्वान श्रीपाद दामोदर सातवलेकर 60 वर्ष की आयु तक एक पाठशाला में ड्रॉइंग पढ़ाते थे। रिटायर होने के बाद उन्होंने संस्कृत सीखी और संस्कृत भाषा के क्षेत्र में इतना काम किया कि देखने वाले दंग रह गये। वेदों का शुद्ध पाठ तैयार करने से लेकर भारतीय संस्कृति का प्रगतिशील स्वरूप प्रतिपादित करने तक के क्षेत्र में उन्होंने इतनी सफलता अर्जित की कि आज भी जहां संस्कृत के सम्बन्ध में कहीं कोई मतभेद उठता है तो उसके समाधान और निराकरण के लिए सातवलेकर के ग्रन्थों को ही आधार माना जाता है।

🔵 महात्मा गांधी ने 45 वर्ष की अवस्था तक सामान्य जीवन जिया और इसके बाद वे एक क्रान्तिकारी सन्त के स्वरूप में उभरकर सामने आये। दादा भाई नौरोजी ने 50 वर्ष की आयु में अपना राजनैतिक जीवन आरम्भ किया तथा 60 वर्ष की आयु में पहली बार बम्बई कौंशिल के सदस्य चुने गये। 61 वर्ष की अवस्था में वे कांग्रेस के सभापति बने। गोपालकृष्ण गोखले ने 40 वर्ष की आयु में ‘भारत सेवक समाज’ की स्थापना की थी। लोकमान्य तिलक ने यद्यपि 33 वर्ष की आयु में अपना राजनैतिक जीवन आरम्भ किया था किन्तु उनकी गतिविधियां 1905 में ही अधिक सक्रिय हुई तब उनकी आयु 50 वर्ष थी। उसी समय उन्होंने गरम दल की स्थापना की थी।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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