रविवार, 22 जनवरी 2017

👉 आप अपने आपको पहचान लीजिये (भाग 4)


👉 युग ऋषि की अमृतवाणी

🔴 जब लक्ष्मण जी को रामचंद्र जी के साथ भेजने के लिए सुमित्रा ने कहा जाओ बेटा रामचंद्र के साथ साथ जाओ और उनकी धर्मपत्नी ने कहा कि तुम जाओ रामचंद्र जी के साथ साथ जाओ। रामचंद्र जी को वनवास हुआ था लक्ष्मण जी को कहाँ हुआ था लेकिन लक्ष्मण जी भी चले गये कैसे चले गये। सुमित्रा ने कह दिया था और उनकी पत्नी उर्मिला ने कह दिया था। अरे बड़ी खराब थी उनकी धर्मपत्नी और बड़ी खराब थी उनकी माँ अपने बेटे को भेज दिया और राक्षसों की लड़ाई में मारे जाते तो रामचंद्र जी मारे जाते सीता जी को जाना है वनवास तो पिताजी की आज्ञा उनके लिए हुई है लक्ष्मण जी के लिए थोड़े हुई है। लेकिन नहीं लक्ष्मण जी गये। नफा हुआ कि नुकसान हुआ। बताइये। उस समय तो नुकसान हुआ अरे भाई तुमको भेजा नहीं गया तुम बेकार राक्षसों के बीच जा रहे हो जंगल में जा रहे हो भूखे मरने के लिये जा रहे हो नुकसान की बात बताई थी उन्हें हाँ नुकसान की बात थी। पर वास्तव में नुकसान हुआ नहीं वास्तव में नुकसान नहीं हुआ।

🔵 हमारे बारे में भी यही हुआ। हमारे बारे में जब हमारे गुरुजी का साक्षात्कार हुआ। उन्होंने यह कहा कि तुमको हमारे कहने पर चलना चाहिये। सब जितने भी हमारे मिलने वाले थे घर वाले थे जितने भी कुटुम्बी थे सब नाराज हो गये सबने कहा बड़ा बेअकल आदमी है बेवकूफ आदमी है किसने कहा है हमने कहा हमारे पूर्व जन्मों के गुरु आये हैं उन्होंने कहा है। अरे कोई सपना देखा है, पागल हो गया है, इसका दिमाग खराब हो गया है ताले में बंद कर दिया पर जिस आदमी ने हमसे कहा था हमारे फायदे के लिये कहा था कि नुकसान के लिए कहा था। फायदे के लिए कहा था। जब आये थे वह साठ वर्ष पहले की घटना को जब मैं याद करता हूँ और इस समय जब अंदाज लगाता हूँ तो मालूम पड़ता है कि नुकसान की बात नहीं कही थी उन्होंने फायदे की बात कही थी।

🔴  जहाँ इस समय हम आज है उसका और जब १५ वर्ष की उमर क्रम थे उस बच्चे का और इस समय का हमारा स्तर को आप मिलाकर देख लीजिये हमको सलाह मुनासिब दी गई थी कि गलत दी गई थी। नहीं गलत नहीं दी गई थी सलाह बहुत मुनासिब दी गई थी उस सलाह से हमारा फायदा हुआ उस समय मालूम पड़ता था कि नुकसान हो रहा है। २४ वर्ष तक खाना नहीं खाना पड़ेगा जौ की रोटी पर रहना पड़ेगा। यह करना पड़ेगा पढ़ाई लिखाई बंद करनी पड़ेगी यह करना पड़ेगा यह करना पड़ेगा। कितनी बातें बता दी लेकिन उस समय लोगों को मालूम पड़ता था कि नुकसान की बात बताई जा रही है लेकिन वास्तव में वह नुकसान की बात नहीं थी नफे की बात थी।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/lectures_gurudev/31.2

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