रविवार, 22 जनवरी 2017

👉 पराक्रम और पुरुषार्थ (भाग 26) 23 Jan

🌹 उत्साह एवं सक्रियता चिरयौवन के मूल आधार

🔵 होमरूल लीग बनाते समय श्रीमती एनीबीसेण्ट की आयु 70 वर्ष की थी। उन्होंने 40 वर्ष की आयु के बाद ही सार्वजनिक क्षेत्र में पदार्पण किया था। इसी प्रकार 45 वर्ष की आयु के बाद राजनैतिक जीवन में प्रवेश करने वाले पं. मोतीलाल नेहरू 58 वर्ष की आयु में कांग्रेस के सभापति बने। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का प्रखर और सक्रिय जीवन 41 वर्ष की आयु के बाद ही आरम्भ हुआ।

🔴 यह तो खैर राजनैतिक जीवन से सम्बन्धित उदाहरण हैं और सामान्यतः समझा जाता है कि राजनीति बूढ़ों का खेल है। इस क्षेत्र में व्यक्ति युवावस्था में प्रवेश करे, तभी वृद्धावस्था तक पहुंचने तक सफलता मिलती है, ऐसी धारणा है। किन्तु और क्षेत्रों में भी ऐसे उदाहरण हैं जिनसे सिद्ध होता है कि प्रगति या सफलता का आयु से कोई सम्बन्ध नहीं है। वह किसी भी उम्र में पाई जा सकती है और वृद्धावस्था में अपने क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित करने वालों के तो ढेरों उदाहरण हैं। यूनानी नाटककार सोफोप्लीज ने 99 वर्ष की आयु में अपना प्रसिद्ध नाटक ‘आडीपस’ लिखा था। यद्यपि उन्होंने इसके पहले भी कई रचनायें लिखी थीं, पर जिन रचनाओं ने उन्हें साहित्यक जगत में प्रतिष्ठित किया वे सभी अस्सी वर्ष की आयु के बाद लिखी गई थीं।

🔵 अंग्रेजी के सुप्रसिद्ध कवि मिल्टन 44 वर्ष की आयु में अन्धे हो गये थे। अन्धे होने के बाद उन्होंने सारा ध्यान साहित्य रचना पर केन्द्रित किया और पचास वर्ष की आयु में अपनी प्रसिद्ध कृति ‘पैराडाइज लास्ट’ लिखी। 62 वर्ष की आयु में उनकी एक और प्रसिद्ध कृति ‘पैराडाइज रीगेड’ प्रकाशित हुई। जर्मन कवि गेटे ने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘‘फास्ट’’ 70 वर्ष की आयु में लिखी थी। 92 वर्ष का अमेरिकी दार्शनिक जॉनडेवी अपने क्षेत्र में अन्य सभी विद्वानों से अग्रणी था, उन्होंने दर्शन के क्षेत्र में 60 वर्ष की अवस्था में ही प्रवेश किया था।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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