गुरुवार, 26 जनवरी 2017

👉 गायत्री विषयक शंका समाधान (भाग 36) 27 Jan

🌹 साधना का स्तर ऊंचा उठाएं

🔴 यों शुभ कार्य के लिए सभी दिन शुभ हैं। फिर भी किसी पर्व से यह साधना आरम्भ की जाय तो अधिक उत्तम है। बसन्त पंचमी, गुरुपूर्णिमा, गायत्री जयन्ती आदि पर्वों से अथवा तिथियों में पंचमी, एकादशी और पूर्णिमा या वारों में रविवार अथवा गुरुवार से अधिक उत्तम है। यों बुरा या निषिद्ध, कोई भी दिन नहीं है। सामान्य नियम यह है कि जब से आरम्भ किया जाय तभी एक वर्ष पूरा होने पर, समाप्त किया जाय। पर्व दिन कुछ आगे-पीछे हों तो उस अवसर पर भी पूर्णाहुति की जा सकती है और शेष जप संख्या को थोड़ी-बहुत घटा-बढ़ाकर सन्तुलन बिठाया जा सकता है।

🔵 वैसे पन्द्रह माला और 24 हजार के दो लघु अनुष्ठानों का नियम भी इस प्रकार बनाया गया है कि इस क्रम से उपासना करने में प्रायः 11 महीनों में ही यह संख्या पूरी हो जाती है। चांद वर्ष पूरे तीन सौ साठ दिन का होता भी नहीं है। तिथियों को घट-बढ़ प्रायः होती रहती है इसलिए पांच लाख की संख्या सरलता पूर्वक हो सकती है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...