गुरुवार, 26 जनवरी 2017

👉 पराक्रम और पुरुषार्थ (भाग 30) 27 Jan

🌹 साहस का शिक्षण—संकटों की पाठशाला में
🔵 पैराशूट द्वारा रंगरूट को हिमाच्छादित प्रदेश में अज्ञात शिखर पर छोड़ दिया जाता है। साथ में भोजन पानी तथा अन्य आवश्यक साधन अत्यल्प मात्रा में उसके साथ होते हैं। सर्दी, गर्मी, तूफान, हिमपात तथा वन्य प्राणियों जैसे संकटों का उसे सामना करना पड़ता है। अल्प साधनों के सहारे उसे प्रस्तुत होने वाले हर संकट से जूझना पड़ता है। प्रमुख समस्या सामने आती है प्रकृति विपदाओं से अपनी सुरक्षा किस प्रकार की जाय, आहार की व्यवस्था कैसे जुटाई जाय? थोड़ी भी असतर्कता उसे मृत्यु के मुंह में धकेल सकती है। अस्तु उसे पूरी जागरूकता का परिचय देना पड़ता है।

🔴 प्रशिक्षण में कितने ही प्रकार के अभ्यास कराये जाते हैं। अल्प आहार में अधिक से अधिक दिन तक कैसे जीवित रहा जा सकता है, यह कष्ट साध्य अभ्यास हिमालय के विभिन्न क्षेत्रों में करना पड़ता है। जल के अभाव में कुछ दिनों तक जीवित रहने की क्षमता के विकास के लिए चालक को भीषण ताप क्रम वाले रेगिस्तान इलाकों में छोड़ दिया जाता है। थोड़ी सी पानी की मात्रा उसके साथ होती है। उसके सहारे उसे अधिक से अधिक दिनों तक मरु प्रदेशों में गुजारा करना पड़ता है। पैदल ही उसे तपते हुए सैकड़ों मील की दूरी तय करके सेना के पड़ाव तक पहुंचना पड़ता है।

🔵 बीहड़ जंगलों में उसे प्रशिक्षण काल में छोड़ दिया जाता है, यह परखने के लिए कि अविज्ञात क्षेत्रों से वह अपनी रक्षा करते हुए किस प्रकार निकल सकता है। थोड़े से खाद्यान्न और पानी के सहारे वह बीहड़ों में कई दिनों तक भटकता हुआ सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के लिए मार्ग ढूंढ़ता है। उसे कितनी बार शेर, बाघ तथा जंगली हाथी जैसे हिंसक जीवों का सामना करना पड़ता है। वनों की बीहड़ता से निकलने के लिए उसे अपने मनोबल एवं साहस का पूरा-पूरा परिचय देना पड़ता है। हिमाच्छादित प्रदेश में रहने का अभ्यास और भी अधिक कष्ट साध्य है। शून्य डिग्री से भी नीचे तापक्रम में शरीर को रहने के लिए अभ्यस्त करना एक कठोर परीक्षा की अवधि होती है। शारीरिक एवं मानसिक क्षमता को निखारने एवं समर्थ बनाने वाली शिक्षण की इन प्रक्रियाओं से होकर गुजारने के बाद शिक्षार्थी को उत्तीर्ण घोषित किया जाता है। इस अवधि में उसकी मनोभूमि इतनी दृढ़ बन जाती है कि हर प्रकार के संकट चुनौतियों का सामना वह कर सके।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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