बुधवार, 14 दिसंबर 2016

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 47)

🌹 विभूतिवान व्यक्ति यह करें

🔴 67. युग-निर्माण प्रेस— प्रायः प्रत्येक नगर में एक-एक युग-निर्माण प्रेस होना चाहिए, जिसके माध्यम से उसके संचालक अपनी रोजी-रोटी सम्मानपूर्वक कमा लिया करें और साथ ही उस केन्द्र से आस-पास के क्षेत्र में भावनाओं के विस्तार का कार्य-क्रम चलता रहा करे। छोटे प्रेस न्यूनतम 4 हजार की पूंजी से भी चल सकते हैं। साधन सम्पन्न प्रेसों के लिए अधिक पूंजी उपलब्ध करनी पड़ेगी।

🔵 व्यक्तिगत पूंजी से या सहयोग समितियां गठन करके यह कार्य आरम्भ किये जा सकते हैं। आमतौर से नये कार्यकर्ताओं को निजी अनुभव तो होता नहीं, उस व्यवसाय में लगे हुए लोग बारीकियों को बताते नहीं, इसलिये ऐसे कार्यक्रम प्रायः असफल हो जाते हैं, पर जब उन्हें सांगोपांग शिक्षण उपलब्ध हो जायगा तो फिर किसी कठिनाई की सम्भावना न रहेगी और ऐसे प्रेस प्रत्येक नगर में चलने लगेंगे। इन केन्द्रों से विचार क्रान्ति में भारी योगदान मिल सकता है।

🔴 68. कविताओं का निर्माण और प्रसार— युग निर्माण विचारधारा के उपयुक्त भावनापूर्ण कविताएं प्रत्येक क्षेत्रीय भाषा में, लिखी जांय। उन्हें सस्ते मूल्य पर छोटी-छोटी पुस्तिकाओं के रूप में छापा जाय। जीवन के हर पहलू को स्पर्श करने वाली प्रेरणाप्रद कविताएं सर्वत्र उपलब्ध हों जिससे गायन सम्बन्धी जन-मानस की एक बड़ी आवश्यकता की पूर्ति हो सके। लोकगीतों में प्रेरणा भर देने का कार्य हमें पूरा करना चाहिये। गायन का कोई क्षेत्र ऐसा न बचे जहां उत्कर्ष की ओर ले जाने वाली कविताएं गूंज न रही हों। स्त्रियों द्वारा गाये जाने वाले गीत मंगल अवसर की आवश्यकता के अनुरूप लिखे-छापे और उन्हें सिखाये जाने चाहिये। उच्च साहित्य क्षेत्र से लेकर हल जोतते हुए किसानों तक में गाये जाने योग्य प्रेरणाप्रद कविताओं की भारी आवश्यकता है। इसकी पूर्ति सुसंगठित योजना बना कर ही की जानी चाहिए। यह अभाव किसी भी क्षेत्र में, किसी भी भाषा में रहने न पावे। इस रचनात्मक कार्य को पूरा किये बिना धरती पर स्वर्ग लाने का स्वप्न साकार न हो सकेगा। इसके लिये कवि-हृदय साहित्यकारों को बहुत कुछ करना है।

🔵 साहित्य-निर्माण की उपरोक्त योजनाएं सब दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं। इनमें भाग लेने वाले अपना जीवन धन्य बनावेंगे और देश, जाति की भी बहुत बड़ी सेवा करेंगे। प्रतिभावान लोगों को इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए हम भावना-पूर्वक आमन्त्रण भेजते हैं, उन्हें आवश्यक मार्ग-दर्शन मिलेगा और सहयोग भी।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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