बुधवार, 14 दिसंबर 2016

👉 सतयुग की वापसी (भाग 10) 15 Dec

🌹 महान् प्रयोजन के श्रेयाधिकारी बनें  

🔴 निष्ठा भरे पुरुषार्थ में अद्भुत आकर्षण होता है। उनका प्रभाव भले-बुरे दोनों तरह के प्रयोगों में दिखाई देता है। जब चोर-उचक्के लवार-लफंगे दुराचारी, व्यभिचारी, नशेबाज, धोखेबाज मिल-जुलकर अपने-अपने सशक्त गिरोह बना लेते हैं तो कोई कारण नहीं कि सृजन संकल्प के धनी, प्रामाणिक और प्रतिभाशालियों को अन्त तक एकाकी ही बना रहना पड़े। भगीरथ ने लोकमंगल के लिए सुरसरि को पृथ्वी पर बुलाया तो ब्रह्मा-विष्णु ने गंगा को प्रेरित करके भेजा और धारण करने लिए शिवजी तत्काल तैयार हो गए। नवसृजन में संलग्न व्यक्तियों की कोई सहायता न करे, यह हो ही नहीं सकता। जब हनुमान्, अंगद, नल-नील जैसे रीछ-वानर मिलकर राम को जिताने का श्रेय ले सकते हैं, तो कोई कारण नहीं कि नवसृजन के कार्यक्षेत्र में जुझारू योद्धाओं की सहायता के लिए अदृश्य सत्ता, दृश्य घटनाक्रमों के रूप में सहायता करने के लिए दौड़ती चली न आए?

🔵 विपन्नताएँ इन दिनों सुरसा जैसे मुँह बनाए खड़ी दीखती हैं आतंक रावण स्तर का है। प्रचलनों के चक्रवात, भँवर, अँधड़, तूफान अपनी विनाश क्षमता का नग्न प्रदर्शन करने में कोई कसर रहने नहीं दे रहे हैं। वासना, तृष्णा और अहंता का उन्माद महामारी की तरह जन-जन को भ्रमित और संत्रस्त कर रहा है। नीति को पीछे धकेलकर अनीति ने उसके स्थान पर कब्जा जमा लिया है। यह विपन्नता संसार व्यापी समूचे जनसमुदाय पर अपने-अपने आकार-प्रकार में बुरी तरह आच्छादित हो रही है। ऐसी स्थिति में ६०० करोड़ मनुष्यों का विचार परिष्कार (ब्रेन वाशिंग) कैसे सम्भव हो? गलत प्रचलनों की दिशाधारा उलट देने का सुयोग किस प्रकार मिले? जब अपना छोटा सा घर-परिवार सँभाल नहीं पाते, तो नया इनसान बनाने, नया संसार बसाने और नया भगवान् बुलाने जैसी असम्भव दीख पड़ने वाली सृजन प्रक्रिया को विजयश्री वरण करने की सफलता कैसे मिले?

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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