बुधवार, 14 दिसंबर 2016

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 46)

🌹 विभूतिवान व्यक्ति यह करें

🔴 65. पत्र-पत्रिकाओं की आवश्यकता— युग-निर्माण लक्ष्य में निर्धारित प्रेरणाओं को विशेष रूप से गतिशील बनाने वाले पत्र-पत्रिकाओं की बहुत बड़ी संख्या में आवश्यकता है। जीवन को सीधा स्पर्श करने वाले ऐसे अगणित विषय हैं जिनके लिये अभी कोई शक्तिशाली विचार केन्द्र दृष्टिगोचर नहीं होते। नारी-समस्या, शिशु-पालन, स्वास्थ्य, परिवार-समस्या, अर्थ-साधन, गृह-उद्योग, कृषि, पशु-पालन, समाज शास्त्र, जातीय समस्याएं, अध्यात्म, धर्म, राजनीति, कथा-साहित्य, बाल शिक्षण, मनोविज्ञान, मानवता, सेवा धर्म, सदाचार आदि कितने ही विषय ऐसे हैं जिन पर नाम मात्र का साहित्य है और पत्र-पत्रिकाएं तो नहीं के बराबर हैं। आज जो पत्र निकल रहे हैं वे एक खास ढर्रे के हैं, उनमें न तो मिशिनरी जोश है और न वैसा कार्य-क्रम ही लेकर वे चलते हैं। अब ऐसे पत्र-पत्रिकाओं को बड़ी संख्या में प्रकाशित होना चाहिए जो मानव जीवन के हर पहलू पर प्रकाश उत्पन्न कर सकें।

🔵 योजना के अनुरूप कम से कम सौ पत्र तो इन विषयों पर तुरन्त निकलने चाहिये। जिनमें आवश्यक योग्यता और उत्साह हो उन्हें इसके लिए प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक है।

🔴 66. प्रकाशन की सुगठित श्रृंखला— पुस्तक प्रकाशकों की एक सुगठित ऐसी श्रृंखला होनी चाहिये जो एक-एक विषय पर परिपूर्ण साहित्य तैयार करे। श्रृंखला से संबद्ध प्रकाशक एक दूसरे से अपनी पुस्तकों का परिवर्तन कर लिया करें। इस प्रकार हर प्रकाशक के पास प्रत्येक विषय का प्रचुर साहित्य जमा हो जाया करेगा। अपनी निजी दुकान चला कर, फेरी से अथवा विज्ञापन आदि से जैसे भी उपयुक्त हो उस साहित्य का विक्रय किया जाया करे। इस प्रकार एक विषय का प्रकाशक पारस्परिक सहयोग के आधार पर सभी विषयों की पुस्तकों का प्रचारक बन सकेगा। अनेक वस्तुएं पास में होने से विक्रय सम्बन्धी असुविधा भी न रहेगी।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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