मंगलवार, 2 मई 2017

👉 मानवता के हित में महत्त्वाकांक्षा त्यागी

🔵 घटना उस समय की है, जब यमन के राष्ट्रपति अब्दुल्ला सलाल को अपदस्थ कर रिपब्लिकन नेता श्री रहमान हरयानी को सत्तारूढ किया गया। यह क्रांति रक्तहीन था। बाद में प्रकाशित समचारों से पता चला है कि जन-जीवन को रक्तपात और लूटमार से बचाने का संपूर्ण श्रेय अपदस्थ राष्ट्रपति सलाल को ही था।

🔴 इस युग में जब कि हर देश के नेता अपनी स्वार्थलिप्सा और महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए घृणित से घृणित कार्य करने से भी नहीं चूकते, श्री सलाल ने एक आदर्श सिद्धांत स्थापित किया है कि कोई बात मानवता के हित में है तो उसके लिए अपनी महत्वाकांक्षाओं को ठुकराया भी जा सकता है। श्री सलाल के इस आदर्श ने उनकी खोई प्रतिष्ठा से भी अधिक उन्हें श्रेय और सम्मान दिलाया।

🔵 राष्ट्रपति सलाल जब सत्तारूढ थे, तभी उनकी कई नीतियों का यमन मे तीव्र विरोध चल रहा था। जन-चेतना को सामूहिक शक्ति आज के युग की प्रबलतम शक्ति गिनी गई है। संगठित व्यक्तियों के आगे वैसे भी किसी की चल नहीं सकती। यदि जनतंत्र में बौद्धिक जागृति हो तब तो उसका मुकाबला सेना और तलवारें भी नहीं कर सकती। यदि कुछ हो सकता है तो संघर्ष और रक्तपात अवश्य हो सकता है। यमन में उसी की तैयारी चल पडी थी और अब्दुल्ला सलाल को उस सबकी पूरी और पक्की जानकारी भी थी।

🔴 राष्ट्रपति सलाल सत्तारूढ थे, चाहते तो गृह युद्ध करा देते। अपने अनेक विरोधियों को मारकर वे उस अस्थिरता को समाप्त भी कर सकते थे पर सिद्धॉंतवादी व्यक्ति अपने शत्रु के साथ भी अमानवीय का व्यवहार नहीं करते, यह जो कुछ हो रहा था, वह तो उनके ही देशवासी कर रहे थे, उसके प्रति सलाल जैसा सहृदय व्यक्ति क्रूर एवं कठोर क्यों होता ?

🔵 उन्होंने बगदाद और मास्को यात्रा का कार्यक्रम इसी उद्देश्य से बनाया। एक पक्ष जब निबल पड जायेगा तो गृह-युद्ध की स्थिति ही न आने पायेगी। विरोधी व्यक्तियों ने समझा, यह सब विद्रोह के लिए अच्छा रहेगा। बाद मे सही स्थिति का पता चला तो वह लोग, जिन्होंने श्री सलाल के विरुद्ध बगावत की थी, वह भी उनकी प्रशंसा किये बिना न रहे।

🔴 सबसे पहले अल अनवर समाचार पत्र ने यह खबर देते हुए बताया कि श्री सलाल जब बगदाद यात्रा के लिए चलने लगे तो उन्होंने विद्रोही नेता श्री अनवर हरयानी को पत्र लिखा कि अपने देश को रक्तपात और दूसरे देशों के सामने शर्मिदगी से बचाने के लिए मैं देश छोड रहा हूँ। मैं अपने विरुद्ध की गई हर तैयारी से अवगत हूँ किंतु अपनी प्रजा के अहित के साथ मेरा नाम जुडे मैं यह कभी नहीं चाहता। आप मेरा स्थान ग्रहण करने के लिए चुने गये हैं, तब तक आप गणराज्य बनाए रख सकते है। मैं पहला व्यक्ति हूँ जो इस बात का स्वागत करता हूँ।

🔵 राष्ट्रपति सलाल ने इसके बाद शेष जीवन बगदाद में ही रहकर ईश्वर की उपासना और आत्म-कल्याण में बिताने का निश्चय किया। सारे संसार के नेता ऐसे उदार और मानवता के हितैषी हो जाये तो रक्तपात की परिस्थितियाँ संसार में आए ही क्यों?

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 संस्मरण जो भुलाए न जा सकेंगे पृष्ठ 143, 144

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