मंगलवार, 2 मई 2017

👉 समय का सदुपयोग करें (भाग 19)

🌹 समय के सदुपयोग का महत्व समझिए

🔴 समय संसार की सबसे मूल्यवान् सम्पदा है। विद्वानों एवं महापुरुषों ने वक्त को सारी विभूतियों का कारणभूत हेतु माना है। समय का सदुपयोग करने वाले व्यक्ति कभी भी निर्धन अथवा दुःखी नहीं रह सकते। कहने को कहा जा सकता है कि श्रम से ही सम्पत्ति की उपलब्धि होती है किन्तु श्रम का अर्थ भी वक्त का सदुपयोग ही है। असमय का श्रम पारिश्रमिक से अधिक थकान लाया करता है।

🔵 मनुष्य कितना ही परिश्रमी क्यों न हो यदि वह अपने परिश्रम के साथ ठीक समय का सामंजस्य नहीं करेगा तो निश्चय ही इसका श्रम या तो निष्फल चला जायेगा अथवा अपेक्षित फल न ला सकेगा। किसान परिश्रमी है, किन्तु यदि वह अपने श्रम को समय पर काम में नहीं लाता तो वह अपने परिश्रम का पूरा लाभ नहीं उठा सकता। वक्त पर न जोत कर असमय पर जोता हुआ खेत अपनी उर्वरता को प्रकट नहीं कर पाता। असमय बोया हुआ बीज बेकार चला जाता है। वक्त पर न काटी गई फसल नष्ट हो जाती है। संसार में प्रत्येक काम के लिये निश्चित वक्त पर न किया हुआ काम कितना भी परिश्रम करने पर भी सफल नहीं होता।

🔴 प्रकृति का प्रत्येक कार्य एक निश्चित वक्त पर होता है। वक्त पर ग्रीष्म तपता है, वक्त पर पानी बरसता है, वक्त पर ही शीत आता है। वक्त पर ही शिशिर होता और वक्त पर ही बसन्त आकर वनस्पतियों को फूलों से सजा देता है। प्रकृति के इस ऋतु-क्रम में जरा-सा भी व्यवधान पड़ जाने से न जाने कितने प्रकार के रोगों एवं इति-भीति का प्रकोप हो जाता है चांद-सूरज, गृह-नक्षत्र सब समय पर ही उदय अस्त होते, वक्त के अनुसार ही अपनी परिधि एवं कक्ष में परिभ्रमण किया करते हैं। इनकी सामयिकता में जरा-सा व्यवधान पड़ने से सृष्टि में अनेक उपद्रव खड़े हो जाते हैं और प्रलय के दृश्य दीखने लगते हैं, समय पालन ईश्वरीय नियमों में सबसे महत्त्वपूर्ण एवं प्रमुख नियम है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 Sowing and Reaping (Investment & its Returns) (Last Part)

🔵 Don’t forget to visit my KACHCHA house, if you go to my village sometime in future. All the houses that time in village were KACCHCHE...