मंगलवार, 7 मार्च 2017

👉 "सुनसान के सहचर" (भाग 71)

🌹 हमारी जीवन साधना के अन्तरंग पक्ष-पहलू

🔴 मातृवत् परदारेषु और परद्रव्येषु लोष्टवत् की दो सीढ़ियाँ चढ़ना भी अपने को कठिन पड़ता, यदि जीवन का स्वरूप, प्रयोजन और उपयोग ठीक तरह से समझाने और जो श्रेयस्कर है उसी पर चलने की हिम्मत और बहादुरी नहीं होती। जो शरीर को ही अपना स्वरूप मान बैठा और तृष्णा- वासना के लिए आतुर रहा उसे आत्मिक प्रगति से वंचित रहना पड़ा है। पूजा, उपासना के छिटपुट कर्मकाण्डों के बल पर प्रगति की नाव किनारे नहीं लगी है। हमें २४ वर्ष तक निरंतर गायत्री पुरश्चरणों में निरत रह कर उपासना का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय पूरा करना पड़ा। उस पर कर्मकाण्ड की सफलता का पूरा लाभ तभी संभव हो सका जब अत्यधिक प्रगति की भावनात्मक प्रक्रिया को, जीवन- साधना को उससे जोड़े रखा। 

🔵 यदि दूसरों की तरह हम देवताओं को वश में करने या ठगने के लिए, उनसे मनोकामनाएँ पूरी करने के लिए तन्त्र- मन्त्र का कर्मकाण्ड रचते रहते- जीवन क्रम निर्वाह की आवश्यकता न समझते तो नि:संदेह हमारे हाथ कुछ नहीं पड़ता। हम अगणित भजनानन्दी और तन्त्र- मन्त्र के कर्मकाण्ड़ियों को जानते हैं, जो अपनी धुन में मुद्दतों से  लगे हैं। पूजा- पाठ हमसे ज्यादा लम्बा और चौड़ा है, पर बारीकी से जब उन्हें परखा तो छूँछ मात्र पाया, झूठी आत्म- प्रवंचना उनमें जरूर पायी, जिसके आधार पर यह सोचते थे कि इस जन्म में न सही- मरने के बाद उन्हें स्वर्ग- सुख जरूर मिलेगा; पर हमारी परख और भविष्यवाणी यह है कि इनमें से एक को भी स्वर्ग आदि मिलने वाला नहीं, न उन्हें कोई सिद्ध चमत्कार हाथ लगने वाला है।

🔴 कर्मकाण्ड और पूजा- पाठ में प्राण तभी आते हैं जब साधक का जीवन क्रम उत्कृष्टता की दिशा में क्रमबद्ध रीति से अग्रसर हो रहा हो। उसका दृष्टिकोण सुधर रहा हो और क्रिया कलाप में उस रीति- नीति का समावेश हो जो आत्मवादी के साथ आवश्यक रूप से जुड़े रहते हैं। धूर्त, स्वार्थी, कंजूस और सदा बेटी, बेटों के लिए जीने वाले लोग यदि अपनी विचारणा और गतिविधियाँ परिष्कृत न करें, तो उन्हें तीर्थ, व्रत, उपवास, कथा, कीर्तन, स्नान, ध्यान आदि का कुछ लाभ मिल सकेगा, इसमें हमारी सहमति नहीं है। यह उपयोगी तो हैं, पर इसकी उपयोगिता इतनी है जितनी कि लेख लिखने के लिए कलम की। कलम के बिना लेख कैसे लिखा जा सकता है?

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/Books/sunsaan_ke_shachar/hamari_jivan_saadhna.3

👉 हीरों से भरा खेत

🔶 हफीज अफ्रीका का एक किसान था। वह अपनी जिंदगी से खुश और संतुष्ट था। हफीज खुश इसलिए था कि वह संतुष्ट था। वह संतुष्ट इसलिए था क्योंकि वह ...