सोमवार, 20 मार्च 2017

👉 सद्विचारों की सृजनात्मक शक्ति (भाग 42)

🌹 श्रेष्ठ व्यक्तित्व के आधार सद्विचार

🔴 विचारों की व्यक्ति निर्माण में बड़ी शक्ति होती है। विचारों का प्रभाव कभी व्यर्थ नहीं जाता। विचार परिवर्तन के बल पर असाध्य रोगियों को स्वस्थ तथा मरणान्तक व्यक्तियों को नया जीवन दिया जा सकता है। यदि आपके विचार अपने प्रति ओछे, तुच्छ तथा अवज्ञा पूर्ण हैं तो उन्हें तुरन्त ही बदल दो और उनके स्थान पर ऊंचे उदात्त यथार्थ विचारों का सृजन कर लीजिए। वह विचार-कृषि आपको चिन्ता, निराशा अथवा पराधीनता के अन्धकार से भरे जीवन को हरा-भरा बना देगी। थोड़ा सा अभ्यास करने से यह विचार परिवर्तन सहज में ही लाया जा सकता है। इस प्रकार आत्म-चिंतन करिये और देखिये कि कुछ ही दिन में आप में क्रान्तिकारी परिवर्तन दृष्टिगोचर होने लगेगा।

🔵 विचार कीजिए—‘‘मैं सच्चिदानन्द परमात्मा का अंश हूं। मेरा उससे अविच्छिन्न सम्बन्ध है। मैं उससे कभी दूर नहीं होता और न वह मुझसे ही दूर रहता है। मैं शुद्ध-बुद्ध और पवित्र आत्मा हूं। मेरे कर्तव्य भी पवित्र तथा कल्याणकारी हैं उन्हें मैं अपने बल पर आत्म-निर्भर रह कर पूरा करूंगा। मुझे किसी दूसरे का सहारा नहीं चाहिए, मैं आत्म-निर्भर, आत्मविश्वासी और प्रबल माना जाता हूं।

🔴 असद् तथा अनुचित विचार अथवा कार्यों से मेरा कोई सम्बन्ध नहीं है और न किसी रोग-दोष से ही मैं आक्रान्त हूं। संसार की सारी विषमतायें क्षणिक हैं जो मनुष्य की दृढ़ता देखने के लिए आती हैं। उनसे विचलित होना कायरता है। धैर्य हमारा धन और साहस हमारा सम्बल है। इन दो के बल पर बढ़ता हुआ मैं बहुत से ऐसे कार्य कर सकता हूं जिससे लोक-मंगल का प्रयोजन बन सके। आदि आदि।’’ 

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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