मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

👉 परमार्थ की प्राथमिकता

🔴 जुटफेन का युद्ध-स्थल। सनसनाती हुई गोलियों की आवाज। सेना के प्रधान अधिकारी सर फिलिप सिडनी बडी़ बहादुरी से युद्धरत थे। अनेक सैनिकों को युद्ध-स्थल में उनके द्वारा मार्गदर्शन मिल रहा था। शत्रु की ओर से आई हुई एक गोली उनकी जाँघ में लगी और हड्डी के दो टुकडे़ करके पार निकल गई।

🔵 रक्त की धार फूट पडी, युद्ध करने का उनमें साहस न रहा, बचने की भी कोई आशा न रही। युद्ध में गिरकर प्राण देने की अपेक्षा उन्होंने कैंप में लौटना ज्यादा अच्छा समझा। उनका समझदार घोड़ा उन्हें लेकर पीछे लौट पडा। वह शिविर तक अभी न आ पाए थे कि वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पडे जब मूर्छा टूटी तो उन्होंने संकेत से पानी पीने की इच्छा व्यक्त की। दौडा दौडा़ एक सैनिक गया और कहीं दूर की जलाशय से पानी लाया पानी का पात्र होठों से लगाया ही था, तब तक उनके कानों में पास पडे़ दूसरे सैनिक की आवाज आई जो 'पानी पानी' चिल्ला रहा था पर घायल होने के कारण उठकर पानी पीने की स्थिति में न था।

🔴 सिडनी ने सोचा मेरा तो जीवन वैसे ही समाप्त हो रहा है। शरीर से सारा रक्त निकल चुका है यह पानी मुझमें पुन जीवन न डाल सकेगा, मरते दम तक मेरी प्यास भले ही बुझा दे, मगर यह पानी पास का घायल सैनिक पी लेगा तो शायद उसका जीवन बच सके और मातृभूमि की रक्षा में पुनः योगदान दे सके। सिडनी ने पानी का गिलास अपने होठ से हटा दिया और धीरे से कहा-' यह पानी उस सिपाही को पिला दो।' अनेक सैनिकों ने इस बात का आग्रह किया कि आपका महत्त्व एक साधारण सैनिक से कहीं अधिक है आप पहले पानी पी लीजिये उस सैनिक के लिये भी पानी की व्यवस्था की जायेगी।

🔵 सिडनी ने कहा- आप मुझे इसीलिये तो अधिक महत्त्व देते हैं कि मै आप सबकी तकलीफों को अपनी तकलीफ समझता हूँ, और सबको सच्चे हृदय से प्यार करता हूँ। यदि ऐसा कोई गुण आप मुझ में न देखें तो भला मुझे कौन बडा मानेगा और मेरा क्या मूल्य रहेगा, यदि आप सब एक सैनिक से बडा़ मानते हैं तो मेरा बडप्पन भी इसी में है कि यह पानी उस सैनिक को पीने दूँ।

🔴 सिडनी की आज्ञा से यह पानी उस प्यासे सैनिक को पिला दिया गया और दूसरी बार एक अन्य सैनिक उसी जलाशय से पानी लेकर लौटा तब तक सिडनी अपने प्राण त्याग चुके थे। सिडनी इस ससार में आज भले ही न हों पर अपने अधीनस्थ सैनिकों के प्रति उदार व्यवहार के कारण वे आज भी स्मरण किए जाते हैं।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 संस्मरण जो भुलाए न जा सकेंगे पृष्ठ 29, 30

1 टिप्पणी:

  1. सिडनी ने कहा- आप मुझे इसीलिये तो अधिक महत्त्व देते हैं कि मै आप सबकी तकलीफों को अपनी तकलीफ समझता हूँ, और सबको सच्चे हृदय से प्यार करता हूँ। यदि ऐसा कोई गुण आप मुझ में न देखें तो भला मुझे कौन बडा मानेगा और मेरा क्या मूल्य रहेगा, यदि आप सब एक सैनिक से बडा़ मानते हैं तो मेरा बडप्पन भी इसी में है कि यह पानी उस सैनिक को पीने दूँ।

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