मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

👉 जीवन कैसे जीयें? (भाग 2)

👉 युग ऋषि की अमृतवाणी

🔴 कार्लमार्क्स मजदूरों से ये कहते थे कि ‘‘मजदूरो! एक हो जाओ, तुम्हें गरीबी के अलावा कुछ खोना नहीं है’’ और मैं ये कहता हूँ कि ‘‘अध्यात्म मार्ग पर चलने वाले विद्यार्थियो! तुम्हें अपनी क्षुद्रता के अलावा और कुछ नहीं खोना है। पाना ही पाना है। आध्यात्मिकता के मार्ग पर पाने के अलावा कुछ नहीं है। इसमें एक ही चीज हाथ से गुम जाती है, उसका नाम है, आदमी की क्षुद्रता और संकीर्णता।’’ क्षुद्रता और संकीर्णता को त्यागने में अगर आपको कोई बहुत कष्ट न होता हो तो मेरी प्रार्थना है कि आप इसको छोड़ दें और आप महानता के रास्ते पर चलें। जीवन में भगवान् को अपना हिस्सेदार बना लें। भगवान् के साथ आप नाता जोड़ लें। जोड़ लेंगे तो ये मुलाकात की हिस्सेदारी आपके बहुत काम आयेगी।

🔵 गंगा ने अपने आपको हिमालय के साथ में जोड़े रखा। गंगा का और हिमालय का तालमेल और उसका रिश्ता-नाता ठीक बना रहा और हमेशा गंगा अपना पानी खर्च करती रही, लेकिन पानी की कमी कभी नहीं पड़ने पाई। हिमालय के साथ रिश्ता हम जोड़ें, भगवान् के साथ रिश्ता हम जोड़ें तो हमारे लिये जीवन में कभी अभावों का, कभी उस तरह के संकटों का अनुभव न करना पड़ेगा, जैसे कि सामान्य लोग पग-पग पर जीया करते हैं।

🔴 गंगा का पानी सूखा नहीं, लेकिन नाली का सूख गया। उसने किसी महान् सत्ता के साथ सम्बन्ध मिलाया नहीं। बाढ़ का पानी आया और उछलने लगा। बाढ़ का पानी सूखा और नाला सूख गया। नौ महीने सूखा पड़ा रहा। बरसाती नाला तीन महीने सूखा पड़ा। लेकिन गंगा युगों से बहती चली आ रही है, कभी भी सूखने का नाम नहीं लिया।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/amart_vachan_jivan_ke_sidha_sutra/jivan_kese_jiye

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