मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 97)

🌹 आदर्श विवाहों के लिए 24 सूत्री योजना

🔴 (8) लोक सेवी युग-निर्माता की धर्म सेवा— संसार में जितने भी महत्वपूर्ण जन-आन्दोलन चले और सफल हुए हैं उनके पीछे भावनाशील, उच्च चरित्र, आदर्शवादी लोक सेवकों की शक्ति ही प्रधान आधार रही है। इस बल के अभाव में अन्य साधन कितने ही अधिक होने पर भी कोई बड़ा काम, खास तौर से नव-निर्माण जैसा महान अभियान सफल नहीं हो सकता। इसलिए हमें इस बात का घोर प्रयत्न करना होगा कि कुछ व्यक्ति भजन करके स्वर्ग प्राप्ति के लिए लाल कपड़े वाले बाबाजी नहीं वरन् युग रचना के लिए जनता जनार्दन की आराधना करने वाले विवेकशील त्यागी तपस्वी लोग कर्म क्षेत्र में उतरें और भौतिक एकताओं से ऊंचे उठकर सच्चे महामानवों की तरह अपनी हस्ती विश्व मंगल के लिए लगा दें।

🔵 जिनके बच्चे समर्थ होकर कमाने खाने लगे हैं, जिनके ऊपर ईश्वर की कृपा से ही कमाने की या बच्चों की जिम्मेदारी नहीं है वे वानप्रस्थ की तरह अपने घर रहते हुए भी अपने क्षेत्र में प्रकाश स्तम्भ की तरह काम कर सकते हैं। जिनके ऊपर पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं वे भी अवकाश का थोड़ा बहुत समय समाज सेवा के लिए लगा सकते हैं। इन समयदानी लगनशील लोगों के भागीरथ प्रयत्नों से ही आदर्श विवाहों की प्रथा का प्रचलन सम्भव हो सकेगा।

🔴 युग-निर्माण योजना के सदस्यों को इस धर्म-सेना में सम्मिलित होना चाहिए। इस सेना में भर्ती की शर्त लोक मंगल के लिए नियमित रूप से समय दान करने लगना है। जो पारिवारिक जिम्मेदारियों से निवृत्त हैं उनका धर्म कर्तव्य यह है कि लोक और मोह के बन्धनों को काट कर जनता जनार्दन की सेवा के लिए एक सच्चे तपस्वी की तरह काम करने का व्रत धारण करलें। जिनके पास बहुत जिम्मेदारियां हैं वे भी एक दो घण्टे का समय तो नित्य लगा ही सकते हैं। अपना काम काज करते हुए भी सम्पर्क में आने वाले व्यक्तियों को इस मिशन की प्रेरणा दे सकते हैं। छुट्टी का पूरा दिन इस कार्य के लिए दे सकते हैं।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 धैर्य से काम

🔶 बात उस समय की है जब महात्मा बुद्ध विश्व भर में भ्रमण करते हुए बौद्ध धर्म का प्रचार कर रहे थे और लोगों को ज्ञान दे रहे थे। 🔷 एक ब...