मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

👉 सद्विचारों की सृजनात्मक शक्ति (भाग 3)

🌹 विचार शक्ति सर्वोपरि

🔴 यों संसार में शारीरिक, सामाजिक, राजनीतिक और सैनिक—बहुत सी शक्तियां विद्यमान हैं। किन्तु इन सब शक्तियों से भी बढ़कर एक शक्ति है, जिसे विचार-शक्ति कहते हैं। वह सर्वोपरि है।

🔵 उसका एक मोटा-सा कारण तो यह है कि विचार-शक्ति निराकार और सूक्ष्मातिसूक्ष्म होती है और अन्य शक्तियां स्थूलतर। स्थूल की अपेक्षा सूक्ष्म में अनेक गुना शक्ति अधिक होती है। पानी की अपेक्षा वाष्प और उससे उत्पन्न होने वाली बिजली बहुत शक्तिशाली होती है। जो वस्तु स्थूल से सूक्ष्म की ओर जितनी बढ़ती जाती है, उसकी शक्ति भी उसी अनुपात में बढ़ती जाती है।

🔴 मनुष्य जब स्थूल शरीर से सूक्ष्म, सूक्ष्म से कारण-शरीर, कारण-शरीर से आत्मा और आत्मा से परमात्मा की ओर ज्यों-ज्यों बढ़ता है, उसकी शक्ति की उत्तरोत्तर वृद्धि होती जाती है। यहां तक कि अन्तिम कोटि में पहुंच कर वह सर्वशक्तिमान बन जाता है। विचार सूक्ष्म होने के कारण संसार के अन्य किसी भी साधन से अधिक शक्तिशाली होते हैं। उदाहरण के लिए हम विभिन्न धर्मों के पौराणिक आख्यानों की ओर जा सकते हैं।

🔵 बहुत बार किसी ऋषि, मुनि और महात्मा ने अपने शाप और वरदान द्वारा अनेक मनुष्यों का जीवन बदल दिया। ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा-मसीह के विषय में प्रसिद्ध है कि उन्होंने न जाने कितने अपंगों, रोगियों और मरणासन्न व्यक्तियों को पूरी तरह आशीर्वाद देकर ही भला-चंगा कर दिया। विश्वामित्र जैसे ऋषियों ने अपनी विचार एवं संकल्प शक्ति से दूसरे संसार की ही रचना प्रारम्भ कर दी थी। और इस विश्व ब्रह्माण्ड की, जिसमें हम रह रहे हैं, रचना भी ईश्वर के विचार-स्फुरण का ही परिणाम है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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