गुरुवार, 2 फ़रवरी 2017

👉 गायत्री विषयक शंका समाधान (भाग 42) 3 Feb

🌹 प्रातः सायं उपासना

🔴 एक घण्टे में गायत्री मन्त्र की प्रायः ग्यारह मालाओं का जप सामान्य गति से पूरा हो जाता है। किन्हीं की गति कम हो सकती है और किन्हीं की ज्यादा भी, पर औसत गति यही मानी जा सकती है। इस प्रकार पन्द्रह माला जपने में लगभग डेढ़ घण्टा समय लगना चाहिए। यह सारा समय प्रातःकाल ही लग सके तो अधिक अच्छा है, अन्यथा इसे प्रातः सायं में दो बार भी पूरा किया जा सकता है। सायंकाल से तात्पर्य सूर्य अस्त होने का समय ही नहीं, उसके बाद में रात को सोते समय भी समझना चाहिए। काम पर लगने से पहले सुबह और काम से निवृत्त होने के बाद रात्रि को ही प्रायः समय मिलता है। यही दोनों समय उपासना के लिए सुविधाजनक हैं। अधिक रात्रि बीत जाने पर मुंह बन्द रखकर मानसिक जप द्वारा प्रातःकाल में बची हुई शेष मालाएं पूर्ण की जा सकती हैं। प्रयत्न यही करना चाहिए अधिकांश जप संख्या प्रातःकाल पूर्ण हो जाए। इसके लिए एक घन्टा सुबह और आधा घन्टा रात्रि में अथवा सवा घन्टा सुबह और पन्द्रह मिनट रात्रि में, इस प्रकार समय निर्धारित किया जा सकता है।

🔵 जप के समय गायत्री माता की छवि का अथवा निराकार साधक सविता देवता का मध्य भाग में ध्यान करे और भावना करे कि उसका दिव्य प्रकाश, स्थूल सूक्ष्म और कारण शरीर में प्रवेश कर उन्हें ज्योतिर्मय बना रहा है। उपासना के समय मन को पूरी तरह इष्ट छवि पर केन्द्रित रखना चाहिए, उसे इधर-उधर भटकने नहीं देना चाहिए और न ही दूसरे विचारों को मनःक्षेत्र में प्रविष्ट होने देना चाहिए।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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