रविवार, 19 फ़रवरी 2017

👉 साधक कैसे बनें? (भाग 3)

👉 युग ऋषि की अमृतवाणी
🔴  एक हमारा आमंत्रण अगर आप स्वीकार कर सकें तो बड़ी मजेदार बात होगी। आप हमारी दुकान में शामिल हो जायें। आप दुकान में शामिल हो जायें। हमारी दुकान में बहुत फायदा है। इसमें से हर आदमी को मुनाफेदार शेयर मिल सकता है। माँगने से तो हम थोड़ा सा ही दें पायेंगे। ज्यादा हम कहाँ तक दे पायेंगे? भीख माँगने वाले को कहाँ, किसी ने क्या, कितना दिया है? थोड़ा सा ही दे पाते हैं। लेकिन आप हिस्सेदार क्यों नहीं बन जाते हमारी दुकान में? अन्धे और पंगे का योग क्यों नहीं बना लेते। हमारे गुरु और हमने साझेदारी की है। शंकराचार्य ने और मान्धाता ने साझेदारी की थी। 

🔵 सम्राट अशोक और बुद्ध ने साझेदारी की थी। समर्थ गुरु रामदास और शिवाजी ने साझेदारी की थी। रामकृष्ण परमहंस और विवेकानन्द ने साझेदारी की थी। क्या आप ऐसा नहीं कर सकते? आप हमारे साथ शामिल हो जायें और हम और आप मिलकर के बड़ा काम करें। उसमें से जो मुनाफा आये, वो बाँट लें। अगर आप इतनी हिम्मत कर सकते हों और ये विश्वास कर सकते हों कि हम प्रामाणिक आदमी हैं तो जिस तरीके से हमने अपने गुरु की दुकान में साझा कर लिया है, आप आयें और हमारे साथ साझा करने की कोशिश करें। अपनी पूँजी उसमें लगायें। समय की पूँजी, श्रम की पूँजी, बुद्धि की पूँजी हमारी दुकान में शामिल करें और इतना मुनाफा कमायें जिससे कि आप निहाल हो जायें।

🔴 हमारी जिन्दगी के मुनाफे का यही तरीका है कि हमने अपनी पूँजी को अपने गुरुदेव के साथ में मिला दिया और उनकी कम्पनी में शामिल हो गये। हमारे गुरुदेव हमारे भगवान् की कम्पनी में शामिल हैं। हम अपने गुरुदेव की कम्पनी में शामिल हैं। आप में से हरेक को आवाहन करते हैं कि अगर आपकी हिम्मत है तो आप आयें और हमारे साथ जुड़ जायें और जुड़ करके हम जो लाभ कमायेंगे, भौतिक और आध्यात्मिक ,, उनका इतना हिस्सा आपके हिस्से में मिलेगा कि आप धन्य हो सकते हैं और निहाल हो सकते हैं, उसी तरीके से जैसे कि हम धन्य हो गये, निहाल हो गये। यही है साधकों से हमारा विनम्र अनुरोध।

🌹 आज की बात समाप्त
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/amart_vachan_jivan_ke_sidha_sutra/sadhak_kese_bane

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