रविवार, 19 फ़रवरी 2017

👉 सद्विचारों की सृजनात्मक शक्ति (भाग 15)

🌹 दिव्य विचारों से उत्कृष्ट जीवन
🔴 संसार में अधिकांश व्यक्ति बिना किसी उद्देश्य का अविचारपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं किन्तु जो अपने जीवन में उत्तम विचारों के अनुरूप ढालते हैं उन्हें जीवन ध्येय की सिद्धि होती है। मनुष्य का जीवन उसके भले-बुरे विचारों के अनुरूप बनता है। कर्म का प्रारम्भिक स्वरूप विचार है। अतएव चरित्र और आचरण का निर्माण विचार ही करते हैं यही मानना पड़ता है। जिसके विचार श्रेष्ठ होंगे उसके आचरण भी पवित्र होंगे। जीवन की यह पवित्रता ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाती है, ऊंचा उठाती है। अविवेकपूर्ण जीवन जीने में कोई विशेषता नहीं होती सामान्य स्तर का जीवन तो पशु भी जी लेते हैं किन्तु उस जीवन का महत्व ही क्या जो अपना लक्ष्य न प्राप्त कर सके।

🔵 भले और बुरे— दोनों प्रकार के विचार मनुष्य के अन्तःकरण में भरे होते हैं। अपनी इच्छा और रुचि के अनुसार वह जिन्हें चाहता है उन्हें जगा लेता है, जिनसे किसी प्रकार का सरोकार नहीं होता वे सुप्तावस्था में पड़े रहते हैं। जब मनुष्य कुविचारों का आश्रय लेता है तो उसका कलुषित अन्तःकरण विकसित होता है और दीनता, निकृष्टता, आधि-व्याधि, दरिद्रता, दैन्यता के अज्ञानमूलक परिणाम सिनेमा के पर्दे की भांति सामने नाचने लगते हैं। पर जब वह शुभ्र विचारों में रमण करता है तो दिव्य-जीवन और श्रेष्ठता का अवतरण होने लगता है, सुख, समृद्धि और सफलता के मंगलमय परिणाम उपस्थित होने लगते हैं। मनुष्य का जीवन और कुछ नहीं विचारों का प्रतिविम्ब मात्र है। अतः विचारों पर नियन्त्रण रखने और उन्हें लक्ष्य की ओर नियोजित करने का अर्थ है जीवन को इच्छित दिशा में चला सकने की सामर्थ्य अर्जित करना। जबकि अनियन्त्रित, अवियोजित विचार का अर्थ है, दिशाविहीन अनियन्त्रित जीवन प्रवाह।

🔴 समस्त शुभ और अशुभ, सुख और दुःख की परिस्थितियों के हेतु तथा उत्थान पतन के मुख्य कारण-विचारों को वश में रखना मनुष्य का प्रमुख कर्तव्य है। विचारों को उन्नत कीजिये उनको मंगल मूलक बनाइये, उनका परिष्कार एवं परिमार्जन कीजिये और वे आपको स्वर्ग की सुखद परिस्थितियों में पहुंचा देंगे। इसके विपरीत यदि अपने विचारों को स्वतन्त्र छोड़ दिया उन्हें कलुषित एवं कलंकित होने दिया तो आपको हर समय नरक की ज्वाला में जलने के लिए तैयार रहना चाहिए। विचारों की चपेट से आपको संसार की कोई शक्ति नहीं बचा सकती।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 लक्ष्मीजी का निवास

🔶 एक बूढे सेठ थे। वे खानदानी रईस थे, धन-ऐश्वर्य प्रचुर मात्रा में था परंतु लक्ष्मीजी का तो है चंचल स्वभाव। आज यहाँ तो कल वहाँ!! 🔷 सेठ ...