सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

👉 मन: स्थिति बदले तो परिस्थिति बदले (भाग 24)

🌹 उदारता अपनाई ही जाए  

🔵 इस द्वन्द्व के चलते देवता तो किसी प्रकार सन्तुष्ट भी हो सके और परस्पर एक सीमा तक तालमेल भी बिठा सके, पर दैत्य सर्वदा विग्रह में ही उलझे रह गये। वे न केवल देव पक्ष से जूझते रहे, वरन् आपा-धापी छीना-झपटी में उन्हें अपने स्तर के लोगों से भी आये दिन निपटना पड़ा। अनीति के आधार पर हस्तगत हुई उपलब्धियाँ अपनी बिरादरी वालों को भी चैन से नहीं बैठने देती। उनके बीच, लूट में अधिक हिस्सा पाने की प्रवृत्ति निरन्तर विग्रह भड़काती रहती है। 

🔴 अच्छा होता-कहीं ऐसी समझ उपज सकी होती कि आवश्यकता के अनुरूप साधन इस सुविस्तृत प्रकृति कलेवर में पर्याप्त मात्रा में विद्यमान हैं, तब उन्हें मिल बाँटकर काम चलाने की समझदारी क्यों न अपनाई जाये? पर दुर्बुद्धि न जाने क्यों तथाकथित समझदारों के सिर ताबड़तोड़ आक्रमण करती है, फलत: अभावग्रस्त समझे जाने वालों की तुलना में समर्थ, सशक्त ही अधिक घाटे में रहते हैं। इतना ही नहीं, जब वे उन्मादी हाथियों की तरह लड़ते हैं, तो अपने क्षेत्र की सुविस्तृत हरियाली को रौंद-दबोच कर तोड़-मरोड़ कर रख देते हैं। स्थिति ऐसी बना देते हैं, जिसमें वे स्वयं अपयश के भागी बनते हैं, आत्म प्रताडऩा की आग में जलते हैं और साथ ही वातावरण को विपन्न बनाकर रख देते हैं। न चैन से बैठते हैं और न दूसरों को बैठने देते हैं।    

🔵 मिल बाँटकर खाने योग्य सुविधा-साधन प्रकृति सदा से उत्पन्न करती रही है और भविष्य में भी उसकी यही रीति नीति बनी रहेगी, पर उस हविश को क्या किया जाये, जो संसार भर का सब कुछ अपने ही छोटे से कटोरे में बटोर लेने के लिए बेहतर आकुल रहती है। यद्यपि यह चन्द्रमा, आकाश से उतर कर उसी के घरौंदे में खेलते रहने के लिए न कभी तैयार हुआ और न कभी भविष्य में ऐसा करने के लिए सहमत होते दीख पड़ता है। ऐसी दशा में अबोध बालक कभी स्वयं हैरान हो, कभी घरवालों पर खीझे और कभी आसमान तक लातें चलाकर चन्द्रमा को धराशायी बनाने के लिए रौद्र रूप धारण करे, तो क्या किया जाये?  

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌿🌞     🌿🌞     🌿🌞

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 Sowing and Reaping (Investment & its Returns) (Part 2)

🔵 Just begin to spend all you have of these two things to receive back 100 times of the same, number ONE. Number TWO, your mind is one ...