सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

👉 पूजा-उपासना के मर्म (भाग 1)

👉 युग ऋषि की अमृतवाणी

🔴 पात्रता का विकास अगर आदमी न कर सका। केवल उसके दिमाग पर ये वहम और ये ख्वाब और ये ख्वाहिश जमा हुआ बैठा रहा कि लकड़ी की माला और जबान की नोंक से उच्चारण किया जाने वाला मंत्र राम-राम, राम-राम चिल्लाता रहा, तोते के तरीके से टें-टें, टें-टें, चिल्लाता रहता है और हम राम-राम जबान में से चिल्लाते रहते हैं। राम नाम जबान के कोने में से चिल्लाया गया हो तो बेकार है ऐसा राम का नाम, कुछ फायदा नहीं हो सकता, राम के नाम का।

🔵 लकड़ी के माला के ऊपर जो गायत्री मंत्र घुमाया गया है, मैं नहीं जानता उसमें से कुछ फायदा ले सकता है कि नहीं। मैं लाखों बच्चों को जानता हूँ, जो शिकायत करते हुए आते हैं और कहते हैं राम का नाम जपा था, हमको कोई फायदा नहीं हुआ और लाखों मनुष्य मेरे पास आते रहते हैं और कहते हैं, हमने गायत्री मंत्र जपा था, पर हमको कोई फायदा नहीं हुआ। और मैं इस बात की तस्दीक करता हूँ, कोई फायदा न हुआ है और न आगे होगा। 

🔴 लेकिन मैं आपको यकीन दिला सकता हूँ कि यह गायत्री मंत्र अगर सही तरीके से जपा गया हो और सही तरीके से जीवन में धारण किया गया हो और जीवन की नसों-नाड़ियों में, भावनाओं में, विचारणा में ओत-प्रोत किया गया हो, तो आदमी को चमत्कार दिखा सकता है और चमत्कार का सबूत और चमत्कार का नमूना हूँ मैं, जो आपके सामने बैठा हुआ हूँ। मैं एक नमूना हूँ और मैं एक सबूत हूँ। मेरी जिन्दगी के सैकड़ों पन्नों के अध्याय हैं और वह सब बन्द हैं, मैंने सील बन्द कर दिया है और मैंने इसलिये सील करके रखे हैं कि मेरे मरने तक के लिये उनको खोल के नहीं रखा जाये।

🔵 इतने लोगों की मैंने सेवाएँ की, इतने लोगों की सहायताएँ की। उनकी सेवा और सहायता का ब्यौरा इतना बड़ा है कि आपको यह मालूम पड़ेगा कि जो एक आदमी अपनी समस्याओं को पूरा नहीं कर सकता? एक आदमी अपनी ख्वाहिशों को पूरा नहीं कर सकता? लेकिन एक आदमी इतने ज्यादा मनुष्यों के, इतने ज्यादा किस्म की सहायता करने में समर्थ है। हाँ! मैं कहता हूँ, समर्थ हूँ।

🌹 आज की बात समाप्त
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/amart_vachan_jivan_ke_sidha_sutra/pooja_upasna_ke_marn

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