सोमवार, 9 जनवरी 2017

👉 प्रेमी हृदय का मार्ग

🔴 घृणा, विद्वेष, चिडचिडापन, उतावली, अधैर्य अविश्वास यही सब उसकी संपत्ति थे। यों कहिये कि संपूर्ण जीवन ही नारकीय बन चुका था, उसके बौद्धिक जगत में जलन और कुढन के अतिरिक्त कुछ भी तो नहीं था। सारा शरीर सूखकर काँटा हो गया था। पडोसी तो क्या, पीठ पीछे मित्र भी कहते स्टीवेन्सन अब एक-दो महीने का मेहमान रहा है; पता नही कब मृत्यु आए और उसे पकड ले जाए।

🔵 विश्व-विख्यात कवि राबर्ट लुई स्टीवेन्सन के जीवन की तरह आज सैकडों-लाखों व्यक्तियों के जीवन मनोविकार ग्रस्त हो गये हैं, पर कोई सोचता भी नहीं कि यह मनोविकार शरीर की प्रत्येक जीवनदायिनी प्रणाली पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। रूखा, सूखा बिना विटामिन प्रोटीन और चर्बी के भोजन से स्वास्थ्य खराब नहीं होता; यह तो चिंतन, मनन की गंदगी ऊब और उत्तेजना ही है जो स्वास्थ्य के चौपट कर डालती है शरीर को खा जाती है।

🔴 उक्त तथ्य का पता स्टीवेन्सन को न चलता तो उसकी निराशा भी उसे ले डूबती। पता नही अंत क्या होता ? यह तो अच्छा हुआ कि उसमें बुद्धि से काम लेने की योग्यता थी सो जैसे ही एक मनोवैज्ञानिक मित्र ने उन्हें यह सुझाव दिया कि आप अपने जीवन में परिवर्तन कर डालिए। कुछ दिन के लिए किसी नए स्थान को चले जाइए जहां के लोग आपसे बिल्कुल परिचित न हों। फिर उन्हें अपना कुटुंबी मानकर आप प्रेम, आत्मीयता, श्रद्धा, सद्भावना और उत्सर्ग का अभ्यास कीजिए। आपके जीवन में प्रेम की गहराई जितनी बढे़गी आप उतने ही स्वस्थ होते चले जायेगे यही नहीं आपका यह अब तक का जीवन जो नारकीय बन चुका है, स्वर्गीय आभा में परिवर्तित हुआ दिखाई देगा।

🔵 प्रेम संसार की सृजनात्मक सत्ता है। प्रेम से प्रिय, मधुर और उल्लासवर्धक संसार में कुछ नहीं, जिसने प्रेम करना सीख लिया उसका सूना, उजड़ा और दैन्य-दारिद्रय से ग्रसित जीवन भी हरा-भरा हो गया। यह कथा इस तथ्य का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

🔴 तब श्री स्टीवेन्सन ने थोडा-सा सामान, कुछ पैसे लिए और समोआ द्वीप में जा वसे। पहला दिन, पहला अभ्यास प्रेम का। जिनसे भेंट हुई स्टीवेन्सन का हाथ नमस्कार के लिए पहले उठा कोई घर आया वह चाहे कुली ही रहा हो, ऐसा नही हुआ कि वह स्टीवेन्सन के साथ बैठकर चाय पिये बिना चला गया हो छोटे-छोटे बच्चे रात बेचैनी में काटते सबेरा होते ही स्टीवेन्सन का दरवाजा खटखटाते और बाहर से ही पूछते-अरे यार लुई! तुम अब तक सोए पडे हो कब से खेलने के लिए खड़े हैं आओ बाहर देखो न कितने लोग आ गए हैं?

🔵 स्टीवेन्सन अँगडाई लेकर उठते और कमरे का द्वार खोलकर बाहर आते, बच्चों में ऐसे घुल-मिल जाते कि उन्हें पता भी नहीं चलता कि द्वीप के दूसरे वयस्क प्रौढ, वृद्ध, स्त्री-पुरुष भी वही आ पहुँचे हैं। स्टीवेन्सन उन्हें मीठी-मीठी कहानियाँ सुनाते, अपने और महापुरुषों के जीवन के संस्मरण सुनाते बीच-बीच मे कोई शिक्षात्मक बातें भी कहते जाते, उसका प्रभाव यह होता कि दिन भर लोग कथा के आनंद में झूमते रहते और अपने जीवन की थोड़ी बहुत बुराइयाँ होती, उन्हें निकाल डालने के संकल्प बाँधते। स्टीवेन्सन का स्वास्थ्य तब कोई देखता तो यही कहता-झूठ। यह स्टीवेन्सन नहीं स्टीवेन्सन के शरीर में किसी देवात्मा ने प्रवेश कर लिया है।

🔴 पर सचमुच यह वही स्टीवेन्सन था, जिसने अपने प्रेम से समोआवासियो को संगठित कर, बंदरगाह से नगर तक के ऊबड-खाबड को समान रास्ते चौरस तथा पक्का करा दिया, प्रश्न उठा उस सडक का नाम क्या हो तब सब एक स्वर मे बोल उठे, 'प्रेमी हृदय का मार्ग'। अब तक भी इस सडक का यही नाम है। स्टीवेन्सन इस दुनिया में नहीं होगा तब भी यह सडक उसकी इस प्रेमोपलब्धि की गाथा गाती रहेगी।

👉 होशियारी और समझदारी

🔶 होशियारी अच्छी है पर समझदारी उससे भी ज्यादा अच्छी है क्योंकि समझदारी उचित अनुचित का ध्यान रखती है! 🔷 एक नगर के बाहर एक गृहस्थ महात्म...