सोमवार, 9 जनवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 67)

🌹 बौद्धिक क्रान्ति की तैयारी

🔴 भारतीय संस्कृति के अनुरूप विशुद्ध अध्यात्मदर्शन की रूप रेखा प्रस्तुत करने के लिये आर्ष ग्रन्थों को सर्वसुलभ बनाने की आवश्यकता अनुभव हुई। उसकी पूर्ति के लिये चारों वेदों का सायण भाष्य के आधार पर हिन्दी अनुवाद किया गया और उसे सर्वसुलभ मूल्य पर छापा गया। उसी प्रकार 108 उपनिषदों का भाष्य तीन बड़ी जिल्दों में और छह को दर्शनों का विस्तृत भाष्य छह जिल्दों में प्रस्तुत करके उसे प्रकाशित कराया गया। अब गीता का एक विश्व कोष तैयार किया जा रहा है जो 18 बड़ी-बड़ी जिल्दों में प्रकाशित होगा। इसमें संसार भर के समस्त गीता भाष्यों का समावेश तथा उनमें दीखने वाली उलझनों का विस्तृत समाधान होगा। यह ग्रन्थ इस दृष्टि से इन पंक्तियों के लेखक ने विगत 65 वर्षों के निरन्तर श्रम से प्रस्तुत किया है ताकि बौद्धिक क्रान्ति तथा सामाजिक क्रान्ति की अपनी योजना को भारतीय संस्कृति का पुनरुद्धार मात्र सिद्ध किया जा सके।

🔵 युग-निर्माण विचार धारा को स्थायी साहित्य का रूप देने के लिये सर्व साधारण के उपयुक्त ‘युग-निर्माण पुस्तक माला’ प्रकाशित की जा रही है। हर वर्ष की प्रकाशित पुस्तकों का विज्ञापन प्रायः पुस्तक के अन्तिम टाइटिल पृष्ठ पर छपा होता है। आगे भी प्रयत्नपूर्वक बौद्धिक क्रान्ति का प्रयोजन पूर्ण करने वाला साहित्य छपता रहेगा। प्रयत्न यह किया जा रहा है कि उठते हुए राष्ट्र की बौद्धिक भूख बुझाने के लिए अनेक संस्थानों द्वारा अनेक भाषाओं में अनेक प्रकार का प्रकाशन बहुत बड़े पैमाने पर होने लगे।

🔴 हर शाखा में युग-निर्माण पुस्तकालय स्थापित किए जा रहे हैं। जहां से निःशुल्क घर-घर पुस्तकें पहुंचाने और वापिस लाने की प्रक्रिया आरम्भ करके जन मानस को अभीष्ट दिशा में ढाला जा सके।

🔵 पिछले दिनों मथुरा गायत्री तपोभूमि में दो प्रकार के शिक्षण शिविरों की योजनाएं चलती रही हैं। (1) संजीवन विद्या शिविर। (2) गीता प्रशिक्षण शिविर। दोनों ही एक-एक महीने के लिये होते रहे किस महीने में कौन शिविर होगा इसकी सूचनाएं समय-समय पर अखण्ड ज्योति में छपती रहती थी। इन दोनों शिविरों की रूप रेखा आगे दी जा रही है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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