सोमवार, 9 जनवरी 2017

👉 गायत्री विषयक शंका समाधान (भाग 19) 10 Jan

🌹 गायत्री मंत्र कीलित है?

🔴 यह तांत्रिक साधनाओं का प्रकरण है। वैदिक-पक्ष में इस प्रकार के कड़े प्रतिबन्ध नहीं हैं, क्योंकि वे सौम्य हैं। उनमें मात्र आत्मबल बढ़ाने और दिव्य क्षमताओं को विकसित करने की ही शक्ति है। अनिष्ट करने के लिए उनका प्रयोग नहीं होता। इसलिए दुरुपयोग का अंश न रहने के कारण सौम्य मंत्रों का कीलन नहीं हुआ है। उनके लिए उत्कीलन की ऐसी प्रक्रिया नहीं अपनानी पड़ती जैसी कि तंत्र-प्रयोजनों में। फिर भी उपयुक्त शिक्षा एवं चिकित्सा के लिए उपयुक्त निर्धारण एवं समर्थ सहयोग, संरक्षण की तो आवश्यकता रहती ही है।

🔵 उपयुक्त औषधियां उपलब्ध करने पर भी चिकित्सक के अनुभव एवं संरक्षण की उपयोगिता रहती है। रोगी अपनी मर्जी से अपना इलाज करने लगे—विद्यार्थी अपने मन से चाहे जिस क्रम से पढ़ने लगे, तो उसकी सफलता वैसी नहीं हो सकती, जैसी कि उपयुक्त सहयोग मिलने पर हो सकती है। बिना मार्गदर्शन, बिना सहयोग, संरक्षण के, एकाकी यात्रा पर चल पड़ने वाले अनुभवहीन यात्री को जो कठिनाइयां उठानी पड़ती हैं, वे ही स्वेच्छाचारी साधकों के सामने बनी रहती हैं। वे आश्रयहीन तिनके की तरह हवा के झोंकों के साथ इधर-उधर भटकते छितराते रहते हैं।

🔴 इस दृष्टि से मार्गदर्शन इतनी मात्रा में तो सभी साधनाओं के लिए आवश्यक है कि उन्हें अनुभवी संरक्षण में सम्पन्न किया जाय। स्वेच्छाचार न बरता जाय। जो इस प्रयोजन को पूरा कर सकें, समझना चाहिए कि उनकी गायत्री-साधना का उत्कीलन हो गया और उनकी साधना सरल एवं सफलता सुनिश्चित हो गई।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें