बुधवार, 25 जनवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 83)

🌹 आदर्श विवाहों के लिए 24 सूत्री योजना

🔴 15.वर कन्या भारतीय पोशाक में हों?:-- विवाह एक यज्ञ एवं धर्मानुष्ठान है। इसमें सम्मिलित होने के लिए वर-वधू को भारतीय वेष-भूषा में ही रहना चाहिये।

🔵 आजकल पढ़े-लिखे लड़के विवाह के समय भी ईसाई पोशाक धारण करके अपनी मानसिक गुलामी का परिचय देते हैं। यह अभागा भारत ही ऐसा है जहां के नवयुवक अपनी भाषा, अपनी संस्कृति तथा अपनी वेष-भूषा को तुच्छ समझकर ईसाई संस्कृति की नकल करने में गौरव समझते हैं। विवाह के समय भी वे पेन्ट, टाई जैसे ईसाई लिवास के लिए ही आग्रह करते हैं। उनकी मानसिक दासता विवाह जैसे धर्म कृत्य में तो इस भोंड़े ढंग से प्रदर्शित न हो तो ही अच्छा है। लड़का धोती कुर्ता पहने। ऊपर से जाकेट या बन्द गले का कोट पहना जा सकता है।

🔴 16.सार्वजनिक सत्कार्यों के लिए दान:-- विवाह के हर्षोत्सव में अपनी प्रसन्नता की अभिव्यक्ति लोकोपयोगी सार्वजनिक कार्यों के लिए मुक्तहस्त से दान देकर की जाय।

🔵 विवाहों में दोनों पक्षों को अपने-अपने बड़प्पन की बहुत चिन्ता रहती है। यह दिखाने की कोशिश की जाती रहती है कि हम कितने अमीर और उदार हैं। उसकी एक ठोस कसौटी यह है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार सार्वजनिक सत्कर्मों के लिये उदारता पूर्वक अधिक दान देकर अपने सच्चे बड़प्पन का परिचय दें।

🔴 17. प्रीतिभोज कन्या के स्वागत समारोह के रूप में हो:--
विवाह से एक दिन पहले लड़के के यहां प्रीतिभोज करने का रिवाज है। इसके स्थान पर बारात घर लौट आने पर नवागन्तुक वधू के स्वागत में एक छोटा सम्मान समारोह किया जाय।

🔵 विवाह से पूर्व किए गए प्रीतिभोज में जो लोग जाते हैं उनसे शिष्टाचारवश बारात में चलने के लिये कहना पड़ता है और मन में कम व्यक्ति ले जाने की इच्छा होते हुये भी बारात बढ़ जाती है। इसलिए उसे बारात लौटने पर किया जाय। वे वधू को आशीर्वाद देने आवें और उसे कुछ उपहार भी दें। इससे वधू का मान गौरव बढ़ेगा और उसे प्रसन्नता भी होगी। तब उसे बहुत बड़ा न करके संक्षिप्त या स्वल्पाहार तक सीमित करना भी सरल हो जायगा।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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