बुधवार, 25 जनवरी 2017

👉 "सुनसान के सहचर" (भाग 34)

🌞  हिमालय में प्रवेश

पत्तीदार साग

🔵 सोचता हूं इस संसार में किसी वस्तु का महत्व तभी समझा जायगा जब उसकी उपयोगिता का पता हो। यह तीनों पत्तीदार साग मेरी दृष्टि में उपयोगी थे इसलिये वे महत्वपूर्ण भी जड़ें और स्वादिष्ट थीं। इन पहाड़ियों की इस उपयोगिता को न जाना था और न माना था इसलिए उनके समीप यह मुफ्त का साग मनों खड़ा था पर उससे वे लाभ नहीं उठा पा रहे थे। किसी वस्तु या बात की उपयोगिता जाने और अनुभव किये बिना मनुष्य न तो उसकी ओर आकर्षित होता है और न उसका उपयोग करता है। इसलिए किसी वस्तु का महत्व पूर्ण होने से भी बढ़कर है उसकी उपयोगिता को जानना और उनसे प्रभावित होना।

🔴 हमारे समीप भी कितने ही ऐसे तथ्य हैं जिनकी उपयोगिता समझ ली जाय तो उनसे आशाजनक लाभ हो सकता है। ब्रह्मचर्य, व्यायाम, ब्रह्म मुहूर्त में उठना, सन्ध्या वन्दन, समय का सदुपयोग, सात्विक आहार, नियमित दिनचर्या, व्यसनों से बचना, मधुर भाषण, शिष्टाचार आदि अनेकों तथ्य ऐसे हैं जिनका उपयोग हमारे लिए अतीव लाभदायक है और इनको व्यवहार में लाना कठिन भी नहीं है फिर भी हममें से कितने ही इनकी उपेक्षा करते हैं, व्यर्थ समझते हैं और हृदयंगम करने पर होने वाले लाभों से वंचित रह जाते हैं।

🔵 पहाड़ी लोग उपयोगिता न समझने के कारण ही अपने बिलकुल समीप प्रचुर मात्रा में खड़े पत्तीदार शाकों का लाभ नहीं उठा रहे थे। इसके लिए उनकी निन्दा करना व्यर्थ है। हमारे समीप भी तो आत्मकल्याण के लिए अगणित उपयोगी तथ्य बिखरे पड़े हैं पर हम ही कब उनको व्यवहार में लाते और लाभ उठाते हैं? मूर्खता में कोई किसी से पीछे भी क्यों रहे?

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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