बुधवार, 18 जनवरी 2017

👉 पराक्रम और पुरुषार्थ (भाग 21) 18 Jan

🌹 कठिनाइयों से डरिये मत, जूझिये

🔵 यह तो एक उदाहरण मात्र है जिसमें एक ने अपने आत्मविश्वास के कारण शरीर क्षमता में असमर्थ होते हुए भी दूसरे समर्थ और बलिष्ठ व्यक्ति पर विजय पाई जबकि दूसरा सक्षम और समर्थ होते हुए भी आत्मविश्वास खो देने से असफल रहा। आत्मविश्वास को जीवन और निराशा को मृत्यु कहा गया है। आत्मविश्वासी कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी अपनी इस विशेषता के कारण उनसे जूझने एवं अनुकूल बनाने में समर्थ होते हैं। उनकी सफलता में परिस्थितियों का शरीर बल एवं बुद्धिबल का उतना महत्व नहीं होता, जितना कि स्वयं के मनोबल का।

🔴 सामान्यतः समझा यह जाता है कि साधनों के अभावों, गई-गुजरी परिस्थितियों और प्रतिकूलताओं के कारण ही मनुष्य असफल होता है। परन्तु वास्तविकता यह नहीं है। अपनी क्षीण निस्तेज अनुत्साही मनोवृत्ति के कारण ही लोग पग-पग पर ठोकरें खाते और असफलताओं का मुंह देखते हैं। कठिनाइयां प्रतिकूलतायें उन व्यक्तियों के लिए बाधक हैं जिन्हें अपने आप पर विश्वास नहीं। कुछ करने के लिए एक कदम बढ़ाने से पूर्व उनका मन अनिष्ट की आशंका से डरने लगता है। सफलता मिलेगी भी कि नहीं। इसके विपरीत आत्मविश्वास और मनोबल के धनी व्यक्ति पहाड़ जैसी विपदाओं को भी पैरों तले रौंदने की हिम्मत रखते हैं। प्रतिकूलताओं से प्रगति क्रम में विलम्ब तो हो सकता है पर यह कहना गलत है कि सफलता ही नहीं मिलेगी। यदि प्रचण्ड इच्छा शक्ति, तत्परता और साहसिकता बनी रहे तो अभीष्ट लक्ष्य तक अवश्य पहुंचा जा सकता है।

🔵 ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं जिसमें प्रतिकूलताओं के ऊपर आत्म-विश्वास ने विजय पाई। आत्मविश्वास के अभाव के कारण कितने ही व्यक्ति सामान्यतः पिछड़ेपन से ग्रस्त रहते और अवनति के गर्त में पड़े रहते हैं। कितने ही ऐसे भी होते हैं जो कठिनाइयों को चुनौती देते संघर्षों का आलिंगन करते अन्ततः अभीष्ट तक पहुंचते हैं। अन्तराल में छिपी क्षमतायें उन्हें किसी के आगे हाथ पसारने, गिड़गिड़ाने, दीन-हीन बने रहने के लिए बाध्य नहीं करती। सोया आत्मविश्वास जब जागता है छिपी क्षमतायें जब उभरती हैं— उत्साह जब उमड़ता है तो वह बाहरी सहयोग को भी अपनी आकर्षण शक्ति द्वारा खींच लेता है। तब वह हवाओं का रूप बदलने, दिशाओं को पलट देने, प्रतिकूलताओं को अनुकूलता में बदल देने की सामर्थ्य रखता है। सीमित सामर्थ्यों के होते हुए भी आत्मविश्वास के बल पर कितने ही व्यक्ति सफलता के शिखर पर पहुंचे, इतिहास में ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌿🌞     🌿🌞     🌿🌞

👉 ईश्वर क्या है?

🔶 टेहरी राजवंश के 15-16 वर्षीय राजकुमार के हृदय में एक  प्रश्न उठा  ईश्वर क्या है? 🔷 वह स्वामी रामतीर्थ के चरणों में पहुँचा और प्रणाम ...