सोमवार, 26 दिसंबर 2016

👉 गृहस्थ-योग (भाग 45) 26 Dec

🌹 पारिवारिक स्वराज्य

🔵 यदि कोई गलती कर रहा हो तो एकान्त में उसे प्रेम पूर्वक उसकी ऊंच, नीच, लाभ, हानि समझनी चाहिए। सबके सामने कड़ा विरोध करना, अपमान करना, गाली बकना, मारना पीटना बहुत अनुचित है। इससे सुधार कम और बिगाड़ अधिक होता है। द्वेष दुर्भाव और घृणा की वृद्धि होती है, यह सब होना एक अच्छे परिवार के लिए लज्जाजनक है। समझाने से आदमी मान जाता है और अपमानित करने से वह क्रुद्ध होकर प्रतिशोध लेता एवं उपद्रव खड़े करता है।

🔴 दूसरों की आंख बचाकर अपने लिये अधिक लेना बुरा है। बाजार में चुपके से स्वादिष्ट पदार्थ चट कर आना, चुपके चुपके निजी कोष बनाना, अपने मनोरंजन, शौक या फैशन के लिए अधिक खर्च करना घर भर को ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, आत्मसंतोष और निन्दा के लिए आमंत्रित करना है। बाहर व्यवसाय क्षेत्र में काम करने के लिए यदि बढ़िया कपड़ों की आवश्यकता है तो सब लोगों को यह अनुभव करना चाहिए कि यह शौक या फैशन के लिए नहीं आवश्यकता के लिए किया गया है।

🔵 अधिक परिश्रम की क्षतिपूर्ति के लिए यदि कुछ विशेष खुराक की जरूरत है तो दूसरों को यह महसूस होने देना चाहिए कि यह चटोरेपन के लिए नहीं जीवन-रक्षा के लिये किया गया है। भावनाएं छिपती नहीं, चटोरापन या फैशनपरस्ती बात-बात में टपकती है, विशेष आवश्यकता की विशेष पूर्ति केवल विशेष अवसर पर ही रहती है शेष आचरण सबके साथ घुला−मिला और समान रहता है। जिसे जो विशेष सुविधा प्राप्त करनी हो वह प्रकट रूप से होनी चाहिये।

🌹 अगले अंक में समाप्त
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌿🌞     🌿🌞     🌿🌞

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 रास्ते की बाधा....

🔴 बहुत पुराने समय की बात है एक राज्य के राजा ने अपने राज्य के मुख्य दरवार पर एक बड़ा सा पत्थर रखवा दिया इस पत्थर के रखवाने का मुख्य कारण...