रविवार, 7 अगस्त 2016

👉 ‘साधना से सिद्धि’ में बाधक संचित दुष्कर्म (भाग 4)


🔵 माधवाचार्य ने आँख खोलकर चारों ओर देखा, पर बोलने वाला कहीं दिखाई न पड़ा। उन्होंने कहा–”यहाँ आये दिन भूत−पलीत ऐसी ही छेड़−खानी करने आया करते हैं और ऐसी ही चित्र−विचित्र वाणियाँ बोलते हैं। यदि आप सचमुच ही भैरव हैं तो सामने प्रकट हों। आपके दर्शन करके चित्त का समाधान कर लूँ तो वरदान माँगू।” इसका उत्तर इतना ही मिला। “आप गायत्री उपासक रहे हैं। आपके मुख मण्डल पर इतना ब्रह्म तेज छाया हुआ है कि सामने प्रकट होकर अपने को संकट में डालने की हिम्मत नहीं है। जो माँगना हो ऐसे ही माँग लो।” माधवाचार्य असमंजस में पड़ गये यदि गायत्री पुरश्चरणों से इतना ही ब्रह्मतेज उत्पन्न होता है तो उसकी कोई अनुभूति मुझे क्यों नहीं हुई? सिद्धि का आभास क्यों नहीं हुआ? यह प्रश्न बड़ा रहस्यमय था, जो भैरव के सम्वाद से ही उपजा था। उन्होंने समाधान भी उन्हीं से पूछा। कहा–”देव! यदि आप प्रकट नहीं हो सके और गायत्री उपासना को इतनी तेजस्वी पाते हैं तो कृपा कर यह बता दें कि मेरी इतनी निष्ठा भरी उपासना निष्फल कैसे हो गई? इतना समाधान करा देना भी आपका वरदान पर्याप्त होगा, जब आप गायत्री तेज के सम्मुख होने तक का साहस न कर सके तो आपसे अन्य वरदान क्या माँगू।

🔴 भैरव ने उनकी इच्छापूर्ति की ओर पिछले ग्यारह जन्मों के दृश्य दिखाये। जिसमें अनेकों पाप−कृत्यों का समावेश था। भैरव ने कहा– ‘आपके एक−एक वर्ष के गायत्री पुरश्चरण से एक−एक जन्मों के पाप कर्मों का परिशोधन हुआ है। ग्यारह जन्मों के संचित पाप प्रारब्धों के दुष्परिणाम इन ग्यारह वर्षों के तप साधन से नष्ट हुए है। अब आप नये सिरे से फिर उसी उपासना को करें। संचित प्रारब्ध की निवृत्ति हो जाने से आपको अब के प्रयास में सफलता मिलेगी।

🔵 माधवाचार्य फिर वृन्दावन लौटे और बारहवाँ पुरश्चरण करने लगे। अबकी बार उन्हें आरम्भ से ही साधना की सफलता के लक्षण प्रकट होने लगे और बारहवाँ वर्ष पूरा होने पर इष्टदेव का साक्षात्कार हुआ। उन्हीं के अनुग्रह से वह प्रज्ञा प्रकट हुई जिसके सहारे “माधव−निदान” जैसा महान ग्रन्थ लिखकर अपना यश अमर करने और असंख्यों का हित साधन कर सकने की उपलब्धि उन्हें मिली और जीवन का लक्ष्य पूरा कर सकने में सफल हुए।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी
🌹 अखण्ड ज्योति फरवरी 1982 पृष्ठ 48
http://literature.awgp.org/magazine/AkhandjyotiHindi/1982/February.48

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...