बुधवार, 3 मई 2017

👉 पूर्ण शांति की प्राप्ति

🔴 जिस क्षण हम भगवान के साथ अपनी एकता का अनुभव करना प्रारंभ कर देते हैं, उसी क्षण हमारे हृदय में शांति का स्रोत बहने लगता है। अपने को सदा सुंदर, स्वस्थ, पवित्र एवं आध्यात्मिक विचारों से ओतप्रोत रखना, वस्तुत: जीवन और शांति की प्राप्ति का मार्ग है। इस सत्य को सदा अपने हृदयपट पर अंकित करना कि ``मैं आत्मा हूँ, भगवान का अंश हूँ’’ और हमेशा ही इसी विचारधारा में रहना, शांति का मूल तत्त्व है। कितना करुणाजनक और आश्चर्यप्रद दृश्य है कि संसार में हमें हजारों व्यक्ति चिंतित, दु:खी, शांति की प्राप्ति के लिए इधर-उधर भटकते हुए तथा विदेशों की खाक छानते हुए नजर आते हैं, परंतु उन्हें शांति के दर्शन नहीं होते।

🔵  इसमें तिल मात्र भी संदेह नहीं कि इस प्रकार वे कदापि शांति नहीं प्राप्त कर सकते, चाहे वर्षों तक वे प्रयत्न करते रहें, क्योंकि वे शांति को वहाँ खोज रहे हैं जहाँ कि उसका सर्वथा अभाव है। वे भोले मनुष्य बाह्य पदार्थों की ओर तृष्णा भरी निगाहों से देख रहे हैं, जबकि शांति का स्रोत उनके अपने अंदर बह रहा है। कस्तूरी मृग की नाभि में विद्यमान है, परंतु मृग अज्ञानतावश उसे खोजता फिरता है। जीवन में सच्ची शांति अपने अंदर झाँकने से ही मिल सकती है।

🔴 पूर्ण शांति की प्राप्ति के लिए आवश्यकता है, अपने मन पर नियंत्रण की। हमें मन और इंद्रियों का दास नहीं अपितु उनका स्वामी बनना चाहिए।

🌹 ~अखण्ड ज्योति-मार्च 1947 पृष्ठ 2


http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1947/March/v1.2

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