सोमवार, 25 जून 2018

👉 साधना

🔷 जो तपेगा वो गलेगा, जो गलेगा वो ढलेगा, जो ढलेगा वो बनेगा, जो बनेगा वो मिटेगा और जो मिटेगा बस वही रहेगा! अर्थात जो परमार्थ के लिये अपने आपको निजी स्वार्थ को मिटा देगा बस वही अमर रहेगा

🔶 एक नगर से दो योजन की दुरी पर एक आश्रम बना हुआ था एक महात्मा जी और उनके कुछ शिष्य वहाँ रहते थे! महात्मा जी रोज तप हवन और सत्संग किया करते थे और शिष्य नगर से भिक्षा लेकर आते थे कुछ शिष्य तप करते पर कुछ नही करते थे महात्मा जी बार बार समझाते थे की शिष्यों बिना तप के कुछ नही मिलेगा इसलिये जीवन मे तप जरूरी है!

🔷 एक दिन कुछ शिष्यों ने कहा की हॆ देव आखिर तप से होगा क्या और आप हमें सिद्ध कर के बताये तो महात्मा जी ने कहा ठीक है आज से आप सात दिन तक बिल्कुल निराहार रहोगे केवल जल ग्रहण करोगे फिर सात दिन बाद आप को अपने आप पता चल जायेगा की साधना क्यों जरूरी है!

🔶 सात दिन बाद सभी की हालत मरे हुये बैल की तरह हो गई अब महात्मा जी ने कहा जाओ नगर से भोजन लेकर आओ तो सभी ने कहा की देव हमारे शरीर मे इतना सामर्थ्य नही है की हम वहाँ तक जाकर आ सके! तो महात्मा जी ने कहा अब पता चला की साधना क्यों जरूरी है अरे वत्स शक्तिहीन को यहाँ कोई नही पूछता है इस सत्य को स्वीकार करो वत्स और समझो जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी समझो की शक्ति है तो कोई मूल्य है शक्ति न होगी तो हर कोई गली बाड की तरह कुचल कर चला जायेगा!

🔷 गली बाड की तरह मत रहना अपने आप को मजबुत बाड की तरह बनाना ताकी हर कोई तुम्हे कुचल कर न जायें!  जैसै रोटी जरूरी है तन की समर्थता के लिये वैसे ही साधना बहुत जरूरी है मन की समर्थता के लिये! और जो साधना करेगा वही आगे की यात्रा आनंदपूर्ण कर पायेगा तो उठो और साधो इस जीवन को क्योंकि बिना साधना के कुछ भी नही है तो लो सद्गुरु का आशीर्वाद और चलिए साधना के मार्ग पर और साधो इस जीवन को क्योंकि जो साधेगा वही जगेगा और जो जागेगा वही कुछ पायेगा नही तो जैसै आया है वैसे ही चला जायेगा!

🔶 जीवन में बिना तपे कुछ भी नही मिलता है और बिना त्याग और समर्पण के कुछ भी नही है! धरती बिना तपे अनाज नही देती है दुध भी तभी घी देता है जब वो अग्नि में अपने आपको तपाता है।

🔷 किसी पदधारी से पुछना की उसने कितनी मेहनत की होगी तब जाकर उसे कॊई पद मिला होगा! जो अपने जीवन का तनिक भी मूल्य समझेगा वो इस जीवन में अपना कॊई न कॊई लक्ष्य जरूर बनायेगा और यदि उसने कॊई लक्ष्य बना लिया तो फिर वो साधना जरूर करेगा।

जो साधना करेगा वो जीवन को साधेगा
जो जीवन को साधेगा वो तपेगा
जो तपेगा वो गलेगा
जो गलेगा वो ढलेगा
जो ढलेगा वो बनेगा
जो बनेगा वो मिटेगा
और जो मिटेगा
बस वही रहेगा !!

🔶 सब की अपनी अपनी रणभूमि है वत्स और सब का अपना अपना लक्ष्य और जो अपने लक्ष्य के प्रति जितना ईमानदारी से चलेगा वो उतना ही लाभ में रहेगा!

🔷 इसलिये ये याद रखना की साधना जरूरी ही नही बहुत जरूरी है! और परमार्थ के लिये अपने निहित-स्वार्थ को त्यागना!