रविवार, 11 जून 2017

👉 युग-निर्माण आन्दोलन की प्रगति

🌹 उत्तराधिकार और प्रतिनिधित्व का प्रयोजन
 
🔵 नवम्बर और दिसम्बर की अखण्ड-ज्योति में इसी स्तम्भ के अंतर्गत ‘प्रतिनिधियों की नियुक्ति’ वाली योजना छपी है। प्रसन्नता की बात है कि परिजनों ने उसे गम्भीरता-पूर्वक समझा और ग्रहण किया है। बात सचमुच ऐसी है भी कि उस पर विचार करना हर सदस्य के लिए आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य भी है।

🔴 ‘अखण्ड-ज्योति’ छपे कागजों का व्यापार नहीं है। न उसके पाठक इस तरह के मनचले लोग ही है कि मनोरंजन के लिए, खाली समय काटने के लिये कुछ भी पढ़ते रहने की तरह इस पत्रिका को मँगाते हों। हमने विशेष प्रयत्न और मनोयोगपूर्वक पिछले पच्चीस वर्ष के परिश्रम से इस विशाल जनसमुद्र में से थोड़े से मोती चने हैं। वे ही अखण्ड-ज्योति के सदस्य हैं। जिनकी अन्तरात्मा में पूर्व जन्मों की संग्रहीत उत्कृष्टता मौजूद है, जिन्होंने इस जन्म में भी अपनी अन्तरात्मा को परिष्कृत किया है - जिनके सामने मानव-जीवन की महत्ता और उसकी सार्थकता का प्रश्न उपस्थित रहता है-ऐसे ही लोग इस परिवार के सदस्य बन सके हैं और इन प्रबुद्ध आत्माओं की अन्तःप्रेरणा को जागृत एवं समुन्नत बनाने के लिए एक उपयुक्त साधन के रूप में “अखण्ड-ज्योति” अपना अस्तित्व बनाये हुए है और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिये वह जीवित है

🌹 जागृत आत्माओं का चुनाव

🔵 जागृत आत्माओं को ढूंढ़ने और संग्रह करने में हमको ‘अखण्ड-ज्योति’ के 25 वर्ष पूरे हो गये। अब उसे दूसरे कदम उठाने हैं। जिन विचारों का पिछले वर्षों में प्रचार किया जाता रहा है अब उन्हें मूर्त रूप देने के लिये ठोस गतिविधियाँ अपनानी हैं, और रचनात्मक कार्य खड़े करने हैं। यह सब हम अकेले ही न कर लेंगे, प्रस्तुत योजना की पूर्ति के लिए अनेक सहचरों का श्रम एवं मनोयोग आवश्यक होगा। ऐसे लोग कौन हो सकते हैं, यही चुनावक्रम इन दिनों चल रहा है। तीस हजार अखण्ड-ज्योति सदस्यों में से सभी इतने उत्साही और निष्ठावान नहीं हैं जिन पर इतना भार डाला जा सके कि वे इस मिशन को गतिशील बनाये रहने के लिये हमारी ही तरह कुछ करने के लिये कटिबद्ध हो जाएँ। यों परिवार के सभी परिजन, अखण्ड ज्योति के प्रायः सभी सदस्य अपनी आध्यात्मिक विशेषताओं से सम्पन्न हैं। पर बड़े उत्तरदायित्व संभालने की क्षमता हर किसी में नहीं हैं। बूढ़ा बाप, परिवार के बड़े लड़कों को गृह व्यवस्था चलाने का उत्तरदायित्व सौंपता है, इसको अर्थ यह नहीं कि घर के शेष सब लोगों का महत्व कम है। आगे चलकर छोटे बच्चे भी होनहार हो सकते हैं-वे बूढ़े बाप से भी अधिक योग्य सिद्ध हो सकते हैं, पर आज तो जो भी कंधे पर बोझ ढोने की क्षमता रखते होंगे, उन्हें ही कार्यभार सौंपा जाएगा

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 अखण्ड ज्योति 1965 जनवरी

http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1965/January/v1.50

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