मंगलवार, 27 जून 2017

👉 कायाकल्प का मर्म और दर्शन (भाग 8)

🔴 आप अपना सम्मान चाहते रहें और दूसरों के लिए अपमान का व्यवहार करते रहें, तब आप ऐसा कीजिए, अब आप यहाँ से जब कायाकल्प करके जा ही रहे हैं, तो अपने आपको नम्र बनाकर जाइए और दूसरों को सम्मान देना शुरू कीजिए। अब तक आप यह अपेक्षा करते रहे कि दूसरे आदमी आपके प्रति नम्र रहें और आपका सम्मान करें, तब मैं आपसे यह प्रार्थना करता हूँ कि आप इस रवैये को बदल दीजिए। आप जो दूसरों से नम्रता की आशा करते थे, वह नम्रता आप अपने ऊपर हावी कर लें।

🔵 आप स्वयं नम्र रहें, जितने ज्यादा नम्र हो सकते हों, सुशील हो सकते हों, विनयशील हो सकते हों, सज्जन हो सकते हों, बन जाइए, दूसरों पर इस सम्बन्ध में दबाव मत डालिए और सम्मान? सम्मान आप प्राप्त करना चाहते थे न? मेरी प्रार्थना है, आप यह नियम बदल दीजिए। दूसरों को सम्मान दीजिए। दूसरों को सम्मान देंगे, तो आप देखेंगे कि यह प्राप्त कर सकना आपके लिए सम्भव था। दूसरे आपका सम्मान करें, इसमें दबाव डालने के लिए आप क्या कर सकते हैं, बताइए? नहीं दिया तब? इसलिए पाने का एक ही तरीका है—देना, सम्मान दीजिए और बदले में लीजिए।

🔴 आप उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें कीजिए। आप भविष्य के बारे में समय-समय पर जो बुरी आशाएँ लगाये बैठे रहते हैं, कहीं ऐसा न हो जाए, वैसा न हो जाए, ऐसा हो गया फिर क्या होगा? आप ऐसी कल्पनाएँ क्यों करते हैं? यह कल्पनाएँ क्यों नहीं करते कि भविष्य हमारा अच्छा-ही है। भविष्य अच्छा-अच्छा करते रहे और न हुआ तब? होगा कैसे नहीं? पानी के गिलास में आधा गिलास पानी आपके पास है, आप चाहें, तो यह कहिए कि आधा गिलास कम है और चाहे आप यह कहिए कि खाली गिलास की तुलना में आधा गिलास आ गया। आधा गिलास क्या कम है? पहले खाली गिलास था। अब आधा गिलास हो गया। आप यों प्रसन्न क्यों नहीं हो सकते कि आधा गिलास पानी हमारे पास है।

🔵 आप यही सोचते रहेंगे कि पूरा गिलास नहीं है। बात तो वही हुई; लेकिन विचार करने के तरीके अलग-अलग हो गए। आप विचार करने के तरीके बदलिए। अपने भविष्य के बारे में हमेशा अच्छी आशाएँ कीजिए। लेकिन बुरे के लिए तैयार भी रहिए। अगर ऐसी मुसीबत आयेगी, तो हम लड़ेंगे, मुकाबला करेंगे और साहस का परिचय देंगे—यह हिम्मत भी रखिए और उम्मीदें भी अच्छी कीजिए, खराब उम्मीदें आप क्यों करेंगे? क्या खराब उम्मीद की गारण्टी है कोई? जब खराब भविष्य की गारण्टी नहीं है, फिर आप अच्छे भविष्य की कल्पना करने में क्यों संकोच करते हैं? अच्छे भविष्य की कल्पना करने के लिए आप अपने आपको तैयार कीजिए।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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