गुरुवार, 16 मार्च 2017

👉 सिंक्लेयर स्वस्थ हो गये कैसे?

🔵 'दि जंगल' और 'आयल' आदि प्रसिद्ध उपन्यासों के रचयिता डॉ० अप्टन सिंक्लेयर अमेरिका के विद्वान् लेखक थे। अपना साहित्यिक कार्य वे दिन के १४-१४ घंटे तक करते थे। पर्याप्त विश्राम और जीवन में मनोविनोद का अभाव होने के साथ ही उनकी दिनचर्या भी स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक थीं।

🔴 सिंक्लेयर यद्यपि शराब न पीते, चाय और तंबाकू आदि का प्रयोग न करते थे पर असंयम, समय पर भोजन न करना, जब करना तो भूख से अधिक कर जाना मिर्च-मसालों का उपयोग यह आदतें ही कौन-सी चाय तंबाकू के विष से कम थी। सिंक्लेयर का स्वास्थ्य गिरने लगा। आए दिन जुकाम, खॉसी और बुखार। उनकी साहित्यिक गतिविधियाँ ठप्प पड गई और सामान्य जीवन का भी चलाना कठिन हो गया। आदतें खराब कर लेने पर जो स्वास्थ्य पर दबाव किसी अन्य व्यक्ति पर हो सक्ता था सिंक्लेयर भी उस कष्ट से कैसे बच पाते ?

🔵 वे कुछ दिन जी० एच० कैलाग के बैटल क्रीक सैनिटोरियम में रहे, अच्छी-से-अच्छी दवाइयां की तत्काल तो कुछ आराम मिलता पर दवाओं की प्रतिक्रिया किसी अन्य रूप में फूट पडती। एक तरफ से अच्छे होते और दूसरी ओर नई बीमारी में जकड़ जाते। सिंक्लेयर का जीवन आफत का पुतला बन गया।

🔴 एक दिन उनकी एक महिला से भेंट हुई। यह स्त्री पहले गठिया, जुकाम अग्निमांद्य और नाडी-विकार से पीडित होने के कारण बिल्कुल निर्बल और कांतिविहीन थी, पर इस बार जब वह सिंक्लेयर से मिली तो ऐसी स्वस्थ और सौंदर्ययुक्त दिखाई दे रही थी जैसे इस जीवन में कभी रोग का शिकार हुई ही न हो।

🔵 सिंक्लेयर ने पूछा- ''देवी जी, आपके इस उत्तम स्वास्थ्य का रहस्य क्या है? तो उस भद्र महिला ने बताया- 'उपवास। मैने प्रारंभ में आठ दिन का उपवास किया। प्रारंभ में दो दिन कुछ कठिनाइ जान पड़ी पर तुरंत मुझे पता चला कि मेरे शरीर के दूषित तत्त्व टूट रहे है। कई दिन तक तबियत खराब रही। पसीना, भूक और शरीर से बदबू आती रही और जब उपवास तोडा तो सबसे निचली सतह से रक्त के तेज-कण निकलने लगे, रोग मिटने लगे, भूख बढने लगी। नया खून बढा, शरीर मे ताजगी आई। सौंदर्य और स्वास्थ्य उसी की देन है।''

🔴 सिंक्लेयर को मानो खोये हुए स्वास्थ्य को पाने का एक नया रास्ता मिल गया। उन्होंने पहला उपवास व्रत ११ दिन का रखा ग्यारहवें दिन संतरे का रस लेकर उपवास तोडा। उसके बाद अट्ठाइस दिन तक दुग्ध-कल्प किया। आहार में जब आए तो बिल्कुल हल्के अणुओं वाले खाद्य पदार्थ कुछ दिन तक लेते रहे। उपवास के नियमों का कडाई से पालन किया।

🔵 बारह दिन के उपवास में वजन १७ पौंड घट गया था, चिंतित हो उठे पर उस प्रयोग के मूर्तिमान् लाभ वे देख चुके थे, इसलिए घबराए नहीं। दस दिन के दुग्ध कल्प में उनका वजन २३ पौंड बढ गया और उसके बाद तो उनका शरीर ही चमकने लगा। इससे उन्हें इतनी प्रसत्रता हुई कि कुछ दिन तक अपना सारा ध्यान उपवास द्वारा आरोग्य की उपलब्धि पर केंद्रित रखा। अपने अनुभव बताते हुए वे लिखते हैं- उपवास को मैं अपने जीवन की निधि मानता हूँ मेरा विश्वास है कि छोटे रोग तो उपवास से ऐसे ही दूर किए जा सकते है कि दुबारा होने का डर ही न रहे।"

🔴 सिंक्लेयर के अनुभव का लाभ बाद में उनकी धर्मपत्नी ने भी उठाया। वे भी कमजजोरी, वजन की कमी व नाडी़ दौर्बल्य से बचीं। उपवास द्वारा कई महिलाओं ने भी लाभ उठाए।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 संस्मरण जो भुलाए न जा सकेंगे पृष्ठ 85, 86

2 टिप्‍पणियां:

  1. अदभुत्!
    क्या AWGP को किसी व्यक्ति / follower को ऐसा लाभ मिलने की जानकारी है?

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