शुक्रवार, 3 मार्च 2017

👉 एकाग्रचित्त काम-बहुत बड़े परिणाम

🔴 इंग्लैंड के इतिहास में 'एल्फ्रेड' का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। एल्फ्रेड ने प्रजा की भलाई के लिए अनेक साहसिक कार्य किए जिससे वह महान् एल्फ्रेड (एल्फ्रेड द ग्रेट) के नाम से जाना जाता है।

🔵 प्रारंभ में एल्फ्रेड भी एक साधारण राजा की तरह जो बाप-दादों से होता आया है वह चाहे अच्छा या हो बुरा करने की अंधविश्वासी प्रवत्ति के कारण वह सामान्य व्यक्तियों का सा खाओ पियो और वैभव विलास में डूबे रहो ? जीवन जीने लगा। समुद्र में पडा़ तिनका जिस तरह लहरों के साथ उठता-गिरता है, वैसे ही अस्त व्यस्त जीवन एल्फ्रेड का भी था। एक दिन ऐसा भी आया, जब उसकी यह सुस्ती शत्रुओं के लिये लाभदायक सिद्ध हुई। एल्फ्रेड का राज्य औरों ने हडप लिया और उसे गद्दी से उतारकर मार गिराया।

🔴 इधर-उधर मारे-मारे फिर रहे एल्फ्रेड को एककिसान के घर नौकरी करनी पडी उसे बर्तन माँजने, पानी भरने और चौके का काम सौंपा गया, उसके काम की देख रेख किसान की स्त्री करती थी। एल्फ्रेड छिपे वेष में जिंदगी काटने लगा।

🔵 एक दिन किसान की स्त्री को किसी आवश्यक काम से बाहर जाना पड़ा। बटलोई पर दाल चढी़ थी, सो उसने एल्फ्रेड से कहा कि जब तक मैं वापिस नही आ जाती तुम बटलोई की दाल का ध्याना रखना यह कहकर स्त्री चली गई।

🔴 वहाँ से काम पूरा कर लौटी तो स्त्री ने देखा, एल्फ्रेड एक ओर बैठा कुछ सोच रहा है ओर बटलोई की सारी दाल जल चुकी है। स्त्री ने कहा-मूर्ख नवयुवक। लगता है तुझ पर एल्फ्रेड की छाया पड़ गई है, जो काम सौंपा जाता है उसे कभी एकाग्र चित्त होकर पूरा नहीं करता। तू भी उसकी तरह मारा-मारा घूमेगा।

🔵 स्त्री बेचारी को क्या पता था कि जिससे वह बात कर रही है वह एल्फ्रेड ही है, पर एल्फ्रेड को अपनी भूल का पता चल गया। उसने बात गाँठ बाँध ली, आज से जो कुछ भी करुँगा दत्तचित्त होकर करुंगा। कल्पना के किले बनाते रहने से कोई लाभ नहीं।

🔴 एल्फ्रेड एक बार फिर सहयोगियों से मिला। धन संग्रह किया, सेना एकत्र की और फिर दुश्मनों पर चढा़ई करके लंदन को फिर से जीत लिया। इस बार उसने सारे इंग्लैण्ड को एक सूत्र में बाँधकर नये उत्साह, सूझ-बूझ और एकाग्रता से काम किया, जिससे देश की उन्नति हुई।

🔵 एक दिन एल्फ्रेड़ फिर उस किसान स्त्री के घर गया और उसे बहुत-सा धन देकर कहा-माँ तूने उस दिन शिक्षा न दी होती तो मैं इस स्थिति पर नही पहुँचता। छोटे की भी अच्छी बात मानने के एल्फ्रेड के इस गुण की प्रशंसा की जाती है। स्त्री तो आश्चर्य में डूब गई कि मैंने उस दिन इतने महान आदमी को अनजान में यह शब्द कह दिये।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 संस्मरण जो भुलाए न जा सकेंगे पृष्ठ 62, 63

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