बुधवार, 15 मार्च 2017

👉 "सुनसान के सहचर" (भाग 77)

🌹 हमारे दृश्य जीवन की अदृश्य अनुभूतियाँ

🔴 हो सकता है अखण्ड दीपक अखण्ड यज्ञ का स्वरूप हो। धूपबत्तियों का जलना, हवन सामग्री की, जप मन्त्रोच्चारण की और दीपक, घी होमे जाने की आवश्यकता पूरी करता हो और इस तरह अखण्ड हवन करने की कोई स्वसंचालित प्रक्रिया बन जाती हो। हो सकता है जल भरे क्लश और स्थापना मे कोई अग्नि जल का संयोग रेल इंजन जैसा भाप शक्ति का सूक्ष्म प्रयोजन पूरा करता हो। हो सकता है अन्तर्ज्योति जगाने में इस बाह्य ज्योति से कुछ सहायता मिलती हो,जो हो अपने को इस अखण्ड ज्योति में भावनात्मक प्रकाश,अनुपम आनन्द,उल्लास से भर- पुल मिलता रहा।    

🔵 बाहर चौकी पर रखा हुआ दीपक कुछ दिन तो बाहर- बाहर जलता दिखा,पीछे अनुभूति बदली और लगा कि हमारे अपने अन्तःकरण में यहि प्रकाश ज्योति ज्यों की त्यों जलती है और जिस प्रकार पूजा की कोठरी प्रकाश से आलोकित वैसे ही अपना समस्त अन्तरन्ग इससे ज्योतिर्मय हो रहा है। शरीर,मन और आत्मा मे स्थूल−सूक्ष्म और कारण कलेवर में हम जिस ज्योतिर्मयता का ध्यान करते रहे हैं, सम्भवतः वह उस अखण्ड दीपक की ही प्रतिक्रिया रही होगी। उपसना की सारी अवधि में भावना क्षेत्र वैसे ही प्रकाश बिखेरता है।

🔴 अपना सब कुछ प्रकाशमय है, अन्धकार के आवरण हट गये, अन्ध तमिस्रा की मोहग्रस्तता गई,प्रकाश पूर्ण भावनाएँ- विचारणाएँ और गतिविधियाँ शरीर और मन पर आच्छादित हैं।सर्वत्र प्रकाश का समुद्र लहलहा रहा है और हम तालाब की मछली की तरह उस ज्योति सरोवर में क्रीड़ा- कल्लोल करते, विचरण करते हैं। इन अनुभूतियों ने आत्म- बल,दिव्य और उल्लास को विकासमान् बनाने में इतनी सहायता पहुँचाई कि जिसका कुछ उल्लेख नही किया जा सकता।

🔵 हो सकता है यह कल्पना ही हो, पर सोचते जरूर हैं कि यदि यह अखण्ड ज्योति जलाई न गई होती तो पूजा  की कोठरी के धुँधलापन की तरह शायद अन्तरंग भी धुधँला बना होता- अब तो वह दीपक दीपावली के दीप पर्व की तरह अपनी नस- नाड़ियों में जगमगाता दीखता है। अपनी भावभरी अनुभूतियों के प्रवाह में ही जब ३३ वर्ष पूर्व पत्रिका आरम्भ की तो संसार का सर्वोत्तम नाम जो हमें प्रिय लगता था- पसन्द आता था- '' अखण्ड ज्योति'' रख दिया। हो सकता है उसी भावावेश में प्रतिष्ठापित पत्रिका का छोटा सा विग्रह संसार  में मंगलमय प्रगति की, प्रकाश की किरणें बिखेरने में समर्थ और सफल हो सका।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/Books/sunsaan_ke_shachar/hamare_drash_jivan

👉 होशियारी और समझदारी

🔶 होशियारी अच्छी है पर समझदारी उससे भी ज्यादा अच्छी है क्योंकि समझदारी उचित अनुचित का ध्यान रखती है! 🔷 एक नगर के बाहर एक गृहस्थ महात्म...