शुक्रवार, 10 मार्च 2017

👉 "सुनसान के सहचर" (भाग 74)

🌹 हमारी जीवन साधना के अन्तरंग पक्ष-पहलू

🔴 पूजा के ६ घंटे, शेष और १८ घण्टों की भरपूर प्रेरणा देते। काम का जो समय रहा उसमें यह लगता रहा कि इष्ट देवता का तेजस् ही अपना मार्गदर्शक है। उनके संकेतों पर ही प्रत्येक क्रिया- कलाप बना और चल रहा है। लालसा और लिप्सा से, तृष्णा और वासना से प्रेरित अपना कोई कार्य हो रहा हो ऐसा कभी लगा ही नहीं। छोटे बालक को माँ जिस तरह उँगली पकड़कर चलाती है, उसी प्रकार दिव्य सत्ता ने मस्तिष्क को पकड़कर ऊँचा सोचने और शरीर को पकड़कर ऊँचा करने के लिए विवश कर दिया।  

🔵 उपासना के अतिरिक्त जाग्रत अवस्था के जितने घण्टे रहे उनमें शारीरिक नित्य कर्मों से लेकर आजीविका, उपार्जन, स्वाध्याय- चिन्तन परिवार व्यवस्था आदि की समस्त क्रियाएँ इस अनुभूति के साथ चलती रहीं मानो परमेश्वर इन सबका नियोजन और संचालन कर रहा हो। रात को सोने के ६ घण्टे ऐसी गहरी नींद में बीतते रहे मानों समाधि लग गई हो और माता के आँचल में अपने को सौंप कर परम शान्ति और सन्तुष्टि की भूमिका आत्मसत्ता से तादात्म्य प्राप्त कर रही हो। सोकर जब उठे तो लगा- नया जीवन, नया उल्लास, नया प्रकाश अग्रिम मार्गदर्शन के लिए पहले से ही पथ प्रदर्शन के लिए पहले से ही पथ प्रदर्शन के लिए सामने खड़ा है। 

🔴 उपासना के अतिरिक्त जाग्रत अवस्था के जितने घण्टे रहे उनमें शारीरिक नित्य कर्मों से लेकर आजीविका, उपार्जन, स्वाध्याय- चिन्तन परिवार व्यवस्था आदि की समस्त क्रियाएँ इस अनुभूति के साथ चलती रहीं मानो परमेश्वर इन सबका नियोजन और संचालन कर रहा हो। रात को सोने के ६ घण्टे ऐसी गहरी नींद में बीतते रहे मानों समाधि लग गई हो और माता के आँचल में अपने को सौंप कर परम शान्ति और सन्तुष्टि की भूमिका आत्मसत्ता से तादात्म्य प्राप्त कर रही हो। सोकर जब उठे तो लगा- नया जीवन, नया उल्लास, नया प्रकाश अग्रिम मार्गदर्शन के लिए पहले से ही पथ प्रदर्शन के लिए पहले से ही पथ प्रदर्शन के लिए सामने खड़ा है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/Books/sunsaan_ke_shachar/hamari_jivan_saadhna.3

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