रविवार, 5 मार्च 2017

👉 "सुनसान के सहचर" (भाग 69)

🌹 हमारी जीवन साधना के अन्तरंग पक्ष-पहलू

🔴 आमतौर से लोग रोते- कलपते, रोग- शोक से सिसकते- बिलखते किसी प्रकार जिन्दगी की लाश ढोते हैं। वस्तुत: इन्हीं को तपस्वी कहा जाना चाहिए। कष्ट, त्याग, उद्वेग यदि आत्मिक प्रगति के पथ पर चलते हुए सहा जाता, तो मनुष्य योगी, सिद्ध पुरुष, महामानव, देवता ही नहीं भगवान् भी बन सकता था। बेचारों ने पाया कुछ नहीं, खोया बहुत। वस्तुत: यही सच्चे परोपकारी, आत्मदानी और बलिदानी हैं, जिन्होने परिश्रम से लेकर पाप की गठरी ढोने तक का दुस्साहस कर डाला और जो कमाया था उसे साले- बहनोई, बेटे- भतीजों के लिए छोड़कर स्वयं खाली हाथ चल दिए। दूसरे के सुख के लिए स्वयं कष्ट सहने वाले वस्तुत: यही महात्मा, ज्ञानी, परमार्थी अपने को दीखते हैं। वे स्वयं अपने को मायाग्रस्त और पथभ्रष्ट कहते हैं तो कहते रहें

🔵 अपने इर्द- गिर्द घिरे असंख्यों मानव देहधारियों के अन्तरंग और बहिरंग जीवन की- उसकी प्रतिक्रिया परिणति को जब- हम देखते हैं,तो लगता है, इन सबसे सुख और सुविधा जनक जीवन हमीं ने जी लिया। हानि  अधिक से अधिक इतनी हुई कि हमें कम सुविधा और सम्पन्नता का जीवन जीना पड़ा। सम्मान कम रहा और गरीब जैसे दीखे, सम्पदा न होने के कारण दुनियाँ वालों ने हमें छोटा समझा और अवहेलना की। बस इससे अधिक घाटा किसी आत्मवादी को नहीं हो सकता, पर इस अभाव से अपना कुछ भी हर्ज नहीं हुआ, न कुछ काम रुका। दूसरे षड़ष व्यंजन खाते रहे, हमने जौ- चना खाकर काम चलाया। 

🔴 दूसरे जीभ के अत्याचार से पीड़ित होकर रुग्णता का कष्ट सहते रहे, हमारा सस्ता आहार ठीक तरह पचता रहा और निरोगिता बनाये रहा। घाटे में हम क्या रहे? जीभ का क्षणिक जायका खोकर हमने "किवाड़- पापड़" होने की उक्ति सार्थक होती देखी। जहाँ तक जायके का प्रश्न है, उस दृष्टि से तुलना करने पर विलासियों की तुलना में हमारी जौ की रोटी अधिक मजेदार थी। धन के प्रयास में लगे लोग बढ़िया कपड़े, बढ़िया घर, बढ़िया साज- सज्जा अपनाकर अपना अहंकार पूरा करने और लोगों पर रौब गाँठने की विडम्बना में लगे रहे। हम स्वल्प साधनों में उतना ठाठ तो जमा नहीं सके, पर सादगी ने जो आत्म- संतोष और आनन्द प्रदान किया उससे कम प्रसन्नता नहीं हुई, चाहे छिछोरे- बचकाने लोग मखौल उड़ाते रहे हों, पर वजनदार लोगों ने सादगी के पर्दे के पीछे झाँकती हुई महानता को सराहा और उसके आगे सिर झुकाया। नफे में कौन रहा, विडम्बना बनाने वाले या हम?

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/Books/sunsaan_ke_shachar/hamari_jivan_saadhna.3

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...