बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

👉 आप अपने आपको पहचान लीजिये (भाग 11)

👉 युग ऋषि की अमृतवाणी

🔴 अबकी बार वातावरण के संशोधन के लिए हमको फिर उतने ही बड़े यज्ञ की जरूरत पड़ी है। कितने बड़े की वातावरण १०० कुण्डीय यज्ञ से हमने सोचा था कि शायद जैसे भगवान् राम ने दशाश्वमेध किये थे और भगवान् श्रीकृष्ण ने राजसूय यज्ञ किया था ऐसे एक- एक यज्ञ से ही काम चल जायेगा परिस्थितियाँ ऐसी आपको तो नहीं मालूम पड़ती हैं पर हमको जो परिस्थितियाँ मालूम पड़ती है वह ऐसी भयंकर हैं ऐसी भयंकर हैं कि उसको देखकर के हमको एक लाख कुण्डों का संकल्प करना पड़ा। बड़ी ताकतों का मुकाबला करने के लिए बड़ी ताकत चाहिये आपने देखा न कि कितनी फौजें इकट्ठी हो गई हैं कितनी सेना इकट्ठी हो गई है और कितने एटम बम इकट्ठे हो गये हैं और उनके कितने स्टार वार वाले हथियार पैदा हो गये हैं। और दुनिया में क्या से क्या हो गया है इसके लिए सामान्य वस्तुओं से सामान्य वस्तुओं बड़ा काम चलने वाला नहीं है एक लाख कुण्ड की योजना तो आपने पढ़ ली होगी पढ़ी कि नहीं पढ़ी पढ़ ली होगी।

🔵 अच्छा दूसरी योजना पढ़ी आपने नहीं पढ़ी। किसी अंक में निकल गयी है या निकलने वाली है भगवान् बुद्ध के जमाने में दो विश्वविद्यालय स्थापित हुये थे। एक नालंदा का हुआ था एक तक्षशिला का हुआ था दो यूनिवर्सिटी थी अब तो यूनीवर्सिटी नाम रख लेते हैं और उसमें जो विद्यार्थी होते हैं लोकल विद्यार्थी होते हैं एकाध जिले के विद्यार्थी होते हैं। सारे भारत के होते है सारे भारत में तो ऐसी न जाने कितनी यूनीवर्सिटी हैं। सारे विश्व में अरे बाबा सारे विश्व में एक एक देश में अमेरिका में ६००० यूनिवर्सिटी हैं और कहाँ कहाँ कितनी कितनी यूनीवर्सिटी है विश्व में। विश्वविद्यालय काय बात का। लेकिन विश्वविद्यालय में ३०००० धर्मप्रचार पढ़ायें जा रहे थे हमने एक विश्वविद्यालय चलाने का संकल्प किया है उसमें एक लाख प्रचारक चाहिये।

🔴 एक लाख प्रचारक एक लाख हाँ भगवान् बुद्ध के पास थे नई थे तो सही बहरहाल उस समय थे जब भगवन् बुद्ध का स्वर्गवास हो गया था उसके बाद जिन लोगों ने दीक्षा ली थी उस समय तो थे। गाँधी जी के आन्दोलन में एक लाख आदमी थे सत्याग्रही नहीं वह पहले एक बार चले गये दुबारा गये तिबारा गये चौबारा इस तरह से जेल जाने वालों की संख्या तो एक लाख हो गयी होगी लेकिन व्यक्ति एक लाख नहीं थे एक लाख व्यक्तियों को हमने प्रशिक्षित करने का संकल्प लिया है।

🔵 खुली हुई यूनीवर्सिटियाँ हिन्दुस्तान में कई जगह स्थापित होने वाली हैं अभी। उनमें कितने विद्यार्थी होंगे। किसी में हजार होंगे किसी में ५०० होंगे किसी में २००० होंगे लेकिन एक लाख विद्यार्थियों का प्रशिक्षण करने का विद्यार्थियों को नहीं धर्मप्रचारकों को विद्यार्थियों का नहीं युग का सृजन करने वालों का ऐसे एक लाख व्यक्ति हमको तैयार करने हैं ऐसा एक विश्वविद्यालय चलाना है जिसमें से ऐसे विद्यार्थी निकले, ऐसे विद्यार्थी निकले जो जहाँ कहीं भी जायें तहलका मचाते हुये चले जायें।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/lectures_gurudev/31.4

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