सोमवार, 16 जनवरी 2017

👉 अध्यात्म एक प्रकार का समर (अमृतवाणी) भाग 9

जिह्वा ही नहीं, हर इंद्रिय का सदुपयोग करें

🔴 मित्रो! ये जिह्वा का संकेत है, जो हम बार- बार पानी पीने के नाम पर, पवित्रीकरण के नाम पर, आचमन करने के नाम पर आपको सिखाते हैं और कहते हैं कि जीभ को धोइए, जीभ को साफ कीजिए। जिह्वा को आप ठीक कर लें तो आपका मंत्र सफल हो जाएगा। तब राम नाम भी सफल हो अता है, गायत्री मंत्र भी सफल हो सकता है और जो भी आप चाहे सफल हो सकता है।

🔵 यह आत्मसंशोधन की प्रक्रिया है। जीभ का तो मैंने आपको एक उदाहरण दिया है। इसके लंबे में कहाँ तक जाऊँ कि आपको सारी की सारी इंद्रियों का वर्णन करूँ और उनके संशोधन की प्रक्रिया बताऊँ कि आप अमुक इंद्रिय का संशोधन कीजिए। आँखों का संशोधन कीजिए। आँखों में जो आपके शैतान बैठा रहता है, जो छाया के रूप में प्रत्येक लड़की को आपको वेश्या दिखाता है। स्कूल पाने कौन जाती है वेश्या। ये कौन बैठी है वेश्या! सड़क पर कौन जाती है? गंगाजी पर कौन नहा रही है? सब वेश्या। श्री साहब! दुनिया में कोई सती, साध्वी, बेटी, माँ, बहन कोई है?

🔴 नहीं साहब! दुनिया में कोई बहन नहीं होती, कोई बेटी नहीं होती। जितनी भी रेलगाड़ियों में चल रही हैं, जितनी भी गंगाजी में नहाती हैं जो स्कूल जा रही हैं, ये सब वेश्या हैं। नहीं बेटे, ये वेश्या कैसे हो सकती हैं। तेरी भी तो कन्या होगी? तेरी भी तो लड़की स्कूल जा रही होगी। वह भी फिर वेश्या है क्या? नहीं साहब! हमारी लड़की तो वेश्या नहीं है। बाकी सब वेश्या हैं। ये कैसे हो सकता हैं? बेटे, यह तेरे आँखों का राक्षस, आँखों का शैतान, आँखों का पशु और आँखों का पिशाच तेरे दिल दिमाग में छाया हुआ है। यही तुझे यह दृश्य दिखाता है। इसका संशोधन कर, फिर देख तुझे हर लड़की में, हर नारी में अपनी बेटी, अपनी बहन, और अपनी माँ की छवि दिखाई देगी।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/Pravachaan/pravaachanpart4/aadhiyatamekprakarkasamar.3

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...