सोमवार, 16 जनवरी 2017

👉 पराक्रम और पुरुषार्थ (भाग 20) 17 Jan

🌹 कठिनाइयों से डरिये मत, जूझिये

🔵 अमेरिका का हार्टफोर्ड कनेक्टिकल हॉल दर्शकों से खचाखच भरा था। 19 नवम्बर 1901 के दिन घूंसेबाज़ी का एक अनोखा मैच था। प्रसिद्ध अमेरिकी घूंसेबाज टेरी मेकगवर्न का एक नये प्रतिस्पर्धी के साथ मुकाबला था अब तक 6 खिलाड़ी उसे हराने के प्रयत्न में स्वयं ही मात खा चुके थे। टेरी के प्रशंसक आज पुनः उसकी विजय की आशा ही नहीं दृढ़ विश्वास लेकर आये थे। यह स्वाभाविक भी था—घूंसेबाज़ी में उसकी कुशलता और निपुणता देखते ही बनती थी। प्रतिस्पर्धी पर वह बड़ी फुर्ती एवं निर्ममता के साथ घूंसे चलता इसलिए ‘टेरिबल टेरी’ के नाम से वह जनता में विख्यात था। 1889 टेरी की उम्र जब केवल 19 वर्ष की थी तत्कालीन लाइटवेट चैम्पियन ‘पेडलरपामर’ को केवल 75 सेकेंडों में धराशायी कर दिया। उसके बाद 1900 में जॉर्ज डिक्सन को हराकर विश्व फेदरवेट चैम्पियन का पद भी हासिल कर लिया। तब से इस पद से हटाने के लिए प्रतिस्पर्धी निरन्तर प्रयत्नशील थे।

🔴 लम्बी प्रतिक्षा के बाद रिंग में मदमस्त हाथी के सामने खड़े एक दुबले पतले अनजान व्यक्ति कार्बेट को देख दर्शकों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। कई सहृदय व्यक्ति कार्बेट के प्रति सहानुभूति दर्शाने लगे कि ‘क्यों बेकार में यह अभागा अपनी जान देने आ गया।’ ऐसे कितने ही उद्गार चारों ओर सुने जा सकते थे। इन सब बातों से अनभिज्ञ कार्बेट के चेहरे पर दृढ़ विश्वास झलक रहा था।

🔵 मैच शुरू हुआ। टेरी ने अपनी आदत के अनुसार प्रारम्भ में घूंसों की बौछार शुरू कर दी। उत्साह-उमंग और चुस्ती-स्फूर्ति से भरा हुआ कार्बेट टेरी का हर वार बचाये जा रहा था। एक ओर टेरी की अन्धाधुन्ध घूंसों की बौछार और दूसरी ओर कार्बेट की गजब की स्फूर्ति। स्थिति यह थी कि कोई नया दर्शक यही समझता कि कार्बेट चैम्पियन है और टेरी नौसिखिया। ऐसी स्थिति में टेरी जैसे मंजे खिलाड़ी का आत्मविश्वास डगमगा गया वह बौखला उठा। अब टेरी इस प्रयास में था कि किसी भी तरह कार्बेट को एक घूंसा लगाकर अपना खोया विश्वास पुनः प्राप्त कर ले। लेकिन यह सम्भव न हो सका इसी बीच पहला राउण्ड समाप्त हो गया। दूसरे राउण्ड के शुरू होते ही कार्बेट की दाहिनी मुट्ठी का जबर्दस्त घूंसा टेरी के जबड़े पर पड़ा। वह ऐसा गिरा कि फिर वह उठ नहीं सका। रेफरी की गिनती समाप्त हो गई।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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