गुरुवार, 5 जनवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 63)

🌹 युग-निर्माण की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

🔴 97. समय-दान यज्ञ— प्रत्येक विचारशील व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह दूसरों को विचारशील बनाने के लिए—युग-निर्माण की भावनाओं को अपने तक ही सीमित न रखकर दूसरों तक पहुंचाने के लिए नियमित रूप से कुछ समय दान करे। जन सम्पर्क के लिए समय निकाले। मित्रों, स्वजन सम्बन्धियों रिश्तेदारों एवं परिचितों से, अपरिचितों से सम्पर्क बनाने के लिये नियमित रूप से उनके घर जाय, अपने विषय की पुस्तकें उन्हें पढ़ने को दें तथा अपने मिशन की चर्चा करें। इस प्रकार अपने सम्पर्क क्षेत्र में प्रकाश फैलाने के लिये अपने समय का एक अंश परमार्थ कार्यों में उसी तरह लगाते रहना चाहिए जिस तरह अन्य दैनिक आवश्यक कार्यों के लिये लगाते रहते हैं।

🔵 98. आत्म चिन्तन और सत्संकल्प— युग-निर्माण का सत्संकल्प हमें नित्य प्रातः उठते समय और रात को सोते समय पढ़ना चाहिये। उसके अनुसार जीवन ढालना चाहिये। सोते समय दिन भर के कामों का लेखा-जोखा लेना चाहिये और जो भूलें उस दिन हुई हों वे दूसरे दिन न होने पावें ऐसा प्रयत्न करना चाहिये। जीवन को दिन-दिन शुद्ध करते रहा जाय।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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