गुरुवार, 19 जनवरी 2017

👉 पराक्रम और पुरुषार्थ (भाग 23) 20 Jan

🌹 आत्मविश्वास क्या नहीं कर सकता?

🔵 जापान के एक छोटे से राज्य पर समीपवर्ती एक बड़े राज्य ने हमला कर दिया। अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित विशाल सेना देखकर जापान का सेनापति हिम्मत हार बैठा। उसने राजा से कहा—‘‘हमारी साधनहीन छोटी-सी सैन्य टुकड़ी इसका सामना कदाचित ही कर पायेगी। नाहक सैनिकों को खत्म करने के बजाय युद्ध न करना ही ठीक है। पर राजा बिना प्रयास के हार मानने के पक्ष में नहीं था। सोचने लगा कि क्या किया जाये? अचानक याद आया कि गांव में एक सिद्ध फकीर है शायद वही कुछ समाधान बता सके यही सोचकर राजा स्वयं फकीर से मिलने चल पड़ा। फकीर तम्बूरा बजाने में मस्त था। राजा ने फकीर की मस्ती तोड़ते हुए कहा कि हमारा राज्य मुसीबत में फंस गया है। दुश्मन ने देश पर आक्रमण कर दिया है और ऐसी विकट स्थिति में सेनापति भी निराश हो चुका है— उसने बताया कि जीत असम्भव है।

🔴 फकीर ने बिना विलम्ब किये उत्तर दिया कि ‘‘सबसे पहले तो आप सेनापति को पद से हटा दीजिये क्योंकि जिसने युद्ध से पहले ही हार की आशंका बता दी वह भला क्या जीत पायेगा? जो स्वयं निराशावादी है वह अपने अधीनस्थ सैनिकों  में कैसे उत्साह उमंग का संचार कर सकेगा।’’ राजा ने समर्थन करते हुए कहा, बात तो ठीक है। लेकिन अब उसका स्थान कौन सम्भलेगा। यदि उसे हटा भी दिया जाता है तो इतने कम समय में दूसरा सेनापति कहां मिलेगा? उसी सेनापति से काम चलाने के अतिरिक्त कोई विकल्प दिखाई नहीं देता।’’

🔵 इस पर फकीर ने उन्मुक्त हंसी हंसते हुए कहा—‘‘आप चिन्ता नहीं करें, सेनापति का स्थान मैं सम्भालूंगा।’’ राजा विस्मय में पड़ गया लेकिन इसके अतिरिक्त और कोई चारा भी तो नहीं था।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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👉 हीरों से भरा खेत

🔶 हफीज अफ्रीका का एक किसान था। वह अपनी जिंदगी से खुश और संतुष्ट था। हफीज खुश इसलिए था कि वह संतुष्ट था। वह संतुष्ट इसलिए था क्योंकि वह ...