गुरुवार, 19 जनवरी 2017

👉 पराक्रम और पुरुषार्थ (भाग 22) 19 Jan

🌹 आत्मविश्वास क्या नहीं कर सकता?

🔵 नेलसन ब्रिटेन का प्रसिद्ध राष्ट्रपति था। उसने अनेक युद्धों में विजय पाई। प्रचण्ड साहस और अटूट आत्मविश्वास ही उसकी विजय के आधार थे। नील नदी के युद्ध के लिए नेलसन ने पूर्व योजना बनाई और अपनी अधीनस्थ सैनिकों के सामने वह योजना रखी। इसी बीच कर्नल वेरी ने सन्देह प्रकट किया—‘‘यदि हमारी विजय नहीं हुई तो संसार का क्या कहेगा?’’ नेलसन ने रोषपूर्ण मुद्रा से तमककर उत्तर दिया—‘‘यदि के लिए नेलसन के पास कोई स्थान नहीं। मैंने जो कुछ निर्णय लिया है उसके अनुसार सभी जुट जायें। निश्चित रूप से विजय हमारी ही होगी यह बात अलग है कि हमारी विजय की कहानी कहने वाले हमसे से थोड़े ही रह जायें।’’

🔴 मोर्चे पर जाने से पूर्व नेलसन ने कप्तान से कहा, ‘‘कल इस समय से पूर्व या तो हमें विजय प्राप्त होगी या मेरे लिए वेस्टमिन्स्टर के गिरजे में कब्र तैयार हो जायेगी, जहां में शान्तिपूर्वक विश्राम करूंगा।’’ कैसे आत्मबल और आत्मविश्वास से भरे शब्द थे। जो अन्त में सत्य सिद्ध हुए। विजय नेलसन के हाथ लगी।

🔵 नेपोलियन का जीवन भी ऐसे दृढ़ संकल्प और मनोबल से भरा था। आल्पस पर्वत की सेण्ट वरनार्ड घाटी का निरीक्षण करके लौटे हुए इंजीनियरों से नेपोलियन ने पूछा ‘क्या रास्ता पार कर सकना संभव है?’ इंजीनियरों ने आशंका व्यक्त करते हुए कहा— ‘‘शायद, पार कर सकें।’’ नेपोलियन ने आगे की बात नहीं सुनी तुरन्त सिपाहियों को आदेश दिया ‘‘आगे बढ़ो!’’ इस दुस्साहसिक निर्णय पर इंग्लैण्ड और आस्ट्रेलिया के लोग आश्चर्य करने लगे कि यह नाटे कद का सामान्य सा व्यक्ति साठ हजार सैनिकों और हजारों मन युद्धास्त्र के साथ इतने ऊंचे आल्पस पर्वत को भला कैसे पार कर सकेगा?

🔴 दृढ़ इच्छा शक्ति और आत्मविश्वास के आधार पर वह आल्पस को भेदकर गन्तव्य तक पहुंचने में सफल हुआ, अन्य कई सेनानायकों के पास समर्थ सेना थी, हथियार वह अन्य उपयोगी साधन थे, पर उनमें वह आत्मविश्वास नहीं था जिसके कारण नेपोलियन का कलेजा कठिनाइयों को देखकर वज्र बन जाता था। वह स्वयं कहा करता था— ‘‘मेरे शब्दकोष में ‘असम्भव’ नामक कोई शब्द नहीं।’’

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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