गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

👉 गायत्री विषयक शंका समाधान (भाग 8) 30 Dec

🌹 गायत्री उपासना का समय

🔴 विधि निषेध का असमंजस अधिक हो तो रात्रि की उपासना मौन मानसिक की जा सकती है। माला का प्रयोजन घड़ी से पूरा किया जा सकता है। माला प्राचीन काल में हाथ से प्रयुक्त होने वाली घड़ी है। परम्परा का निर्वाह करना और माला के सहारे जप करने की नियमितता बनाये रहना उत्तम है। फिर भी रात्रि में माला न जपने से किसी विधि निषेध की मन में उथल-पुथल हो तो माला का काम घड़ी से लेकर नियत संख्या की—उपासना अवधि की नियमितता बरती जा सकती है।

🔵 माला में चन्दन की उत्तम है। शुद्ध चन्दन की माला आसानी से मिल भी जाती है। तुलसी के नाम पर बाजार में अरहर की या किन्हीं जंगली झाड़ियों की लकड़ियां ही काम में लाई जाती हैं। इसी प्रकार रुद्राक्ष के नाम पर नकली गुठलियां ही बाजार में भरी पड़ी हैं। उनके मनमाने पैसे वसूल करते हैं। आज की स्थिति में श्वेत चन्दन की माला ही उत्तम है। यों वे नकली भी खूब बिकती हैं। असली होना आवश्यक है। चन्दन, तुलसी, रुद्राक्ष में से जिसका भी प्रयोग करना हो वह असली ली जाय इसका यथासंभव प्रयत्न करना चाहिए।

🔴 मानसिक जप रात्रि में करने में कोई अड़चन नहीं है। रास्ते चलते, सवारी में बैठे, चारपाई पर पड़े हुए भी मानसिक जप करते रहा जा सकता है। होठ, कण्ठ, जीभ बिना हिलाये मन ही मन जप, ध्यान करने में किसी भी स्थिति—किसी भी समय का कोई प्रतिबन्ध नहीं है। विधिवत् की गई साधना की तुलना में विधि रहित मानसिक जप-ध्यान का फल कुछ कम होता है। इतनी ही कमी है। जितना गुड़ डाला जाय उतना मीठा होने की बात विधिवत् और मानसिक जप पर भी लागू होती है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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