मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

👉 सफल जीवन के कुछ स्वर्णिम सूत्र (भाग 40) 20 Dec

🌹 गम्भीर न रहें, प्रसन्न रहना सीखें

🔵 मनुष्य के पसीने में सम्पदायें भरी हुई हैं और पसीने की बूंदों के साथ सम्पदायें टपकती हैं। रुचिपूर्वक आज के कामों में संलग्न होने से बढ़कर तत्काल आनन्द प्राप्त करने का और कोई तरीका नहीं है।

🔴 जिन्हें जीवन से सचमुच प्यार है और वे उस उपलब्धि का बढ़ा-चढ़ा रसास्वादन करना चाहते हैं, उनके लिए जीवन विज्ञानियों का एक ही परामर्श है कि अपनी मस्ती किसी भी कीमत पर न बेची जाय अपनी स्वतन्त्रता में विवेक के अतिरिक्त और किसी को भी हस्तक्षेप न करने दिया जाय।

🔵 अनुकूल परिस्थितियां, लोगों की अनुकम्पायें, समृद्धि की संभावनाओं की आशा रखने में कोई हर्ज नहीं, पर हिम्मत एकाकी चल पड़ने की होनी चाहिए। हमारा सन्तोष और आनन्द इस बात पर केन्द्रित रहना चाहिए कि हमने भले काम किये, दायित्व निभायें और जो किया उसमें पूरा श्रम और मनोयोग लगाया। इस आधार पर हम हर घड़ी प्रमुदित रह सकते हैं भले ही परिणाम इच्छा के अनुरूप हों या प्रतिकूल।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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